राशि

सूर्य के गोचर का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना। जब सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं तो इसे सूर्य संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य एक राशि में एक माह की अवधि तक गोचर करते हैं। इस दौरान वह विभिन्न राशियों के
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आज पारसी समुदाय नववर्ष मना रहा है। इस नववर्ष को नवरोज नाम से जाना जाता है। नवरोज को सेलिब्रेट करने के पारसियों के अपने तरीके हैं, खास बात यह है कि इन 4 चीजों के जरिए कोई भी नवरोज मना सकता है और अपने दिन को खुशनुमा बना सकता है। कौन-से हैं ये चार एफ,
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संकलन: आर.डी. अग्रवाल ‘प्रेमी’एक बार श्रीकृष्ण से अर्जुन ने पूछा, ‘दान तो मैं भी बहुत करता हूं, परंतु सभी लोग कर्ण को ही सबसे बड़ा दानी क्यों कहते हैं?’ यह प्रश्न सुन श्रीकृष्ण मुस्कराए। श्रीकृष्ण ने पास में ही स्थित दो पहाड़ियों को सोने का बना दिया। इसके बाद वह अर्जुन से बोले, ‘हे अर्जुन,
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प्रस्तुति: राधा नाचीज जहां प्रेम है, वहीं परमात्मा निवास करता है। जब हृदय प्रेम से भरा है तो वहां क्रोध, लोभ आदि विकार के लिए कोई स्थान नहीं बचता। आप यदि अपने हृदय में प्रभु को विराजमान करना चाहते हैं तो हृदय में विषय-विकारों को जगह न दें। ऐसी ही एक घटना मुस्लिम संत राबिया
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हमारे देश में कई संस्कृतियां एक साथ प्रेम पूर्वक रहती हैं, यही हमारे देश और समाज की खूबसूरती है। आज पारसी समुदाय का नववर्ष है। इसे नवरोज के नाम से जाना जाता है… 1/5यह है नवरोज का इतिहास पारसी समुदाय में नवरोज मनाने की परंपरा करीब 3 हजार साल पहले शुरू हुई थी। माना जाता
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आज आपको व्यापार संबंधित कार्यों में लाभ होगा। उगाही, प्रवास, आय आदि के लिए अच्छा दिन है। सरकार तथा मित्रों, संबंधियों से लाभ होगा। उनसे भेंट-उपहार मिलने से आनंद होगा। आपकी आय की अपेक्षा व्यय अधिक होने की संभावना है। व्यावसायिक कार्य के प्रति भागदौड़ हो सकती है। संतान की पढ़ाई के लिए आप संतोष
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गणेशजी कहते हैं कि आज आप सामाजिक तथा सार्वजनिक क्षेत्र में प्रशंसा के पात्र बनेंगे। धन लाभ का योग है। पारिवारिक जीवन में सुख और संतोष का अनुभव होगा। आज आप बौद्धिक चर्चा में हिस्सा लेंगे। वाणी पर संयम रखें। संतान के भविष्य की चिंता हो सकती है। व्यवहार से लाभ होने की संभावना है।
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ग्लानि से आज आपका मन व्यथित रहेगा। प्रफुल्लित, स्फूर्ति और आनंद का आज अभाव हो सकता है। परिजनों के साथ तकरार होने की आशंका है। धन का खर्च हो सकता है तथा अपयश भी मिल सकता है। अनिद्रा परेशान कर सकती है। स्वास्थ्य कुल मिलाकर अनुकूल रहेगा। आर्थिक लाभ और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलने के साथ
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आपको जीवनसाथी और संतान के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या बौद्धिक चर्चा से दूर रहिएगा। अपमान न हो, इसका ध्यान रखें। मित्रों के पीछे खर्च होने की आशंका है। नए कार्य के सफलता ना मिले तो परेशान होने की जरूरत नहीं है, मेहनत करते रहें। प्रवास की योजना
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आपका आज का दिन आनंदपूर्वक बीतेगा। मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। आपके कार्य निर्धारितरूप योजना के अनुसार पूर्ण होंगे। आर्थिक लाभ की संभावना है। अधूरे कार्य पूर्ण होंगे। मायके की ओर से आनंद के समाचार मिलेंगे तथा मायके से लाभ भी हो सकता है। स्वास्थ्य में सुधार आएगा। सहकर्मियों से लाभ होगा। आज का टिप्सः
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आचार्य कृष्ण दत्त शर्मा(मशहूर अभिनेता सचिन पिलगांवकर की पत्नी सुप्रिया पिलगांवकर का जन्मदिन है। इन्हें और आज जन्मे सभी जातकों को जन्मदिन की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं) नया वर्ष रजत पाद से प्रवेश कर रहा है। अगस्त शेष में राजनीतिक क्षेत्र में लाभ मिल सकता है। सितम्बर में ग्रहचाल मध्यम है। गुप्त शत्रुओं के षड़यंत्र से
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आचार्य कृष्ण दत्त शर्माराष्ट्रीय मिति श्रावण 26 शक संवत् 1940 श्रावण शुक्ल सप्तमी शुक्रवार विक्रम संवत् 2075। सौर भाद्रपद मास प्रविष्टे 01 जिल्हिजा 5 हिजरी 1439 (मुस्लिम) तदनुसार अंग्रेजी तारीख 17 अगस्त सन् 2018 ई०। दक्षिणायण उत्तर गोल वर्षा ऋतु। राहुकाल पूर्वाह्न 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक। सप्तमी तिथि अर्धरात्रोत्तर 1 बजकर
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धर्मशास्त्रों के अनुसार, भगवान नर और नारायण ब्रह्मदेव के प्रपौत्र थे। ये ब्रह्माजी के बेटे धर्म और पुत्रबधु रुचि की संतान थे। ये भगवान विष्णु के अवतार हैं। पृथ्वी पर धर्म के प्रसार का श्रेय इन्हीं को जाता है। कहते हैं कि द्वापर युग में नर-नारायण की श्रीकृष्ण और अर्जुन के रूप में जन्मे। पौराणिक
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शास्त्रों में बताया गया है कि जब कलयुग अपने चरम पर होगा तब भगवान विष्णु 10वां अवतार कल्कि के रूप में लेंगे। भगवान विष्णु ने अबतक नौ अवतार लिए हैं और ये अवतार त्रेतायुग, सतयुग और द्वापर युग में हुए थे। पुराणों में बताया गया है कि उनका जन्म शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को
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संकलन: त्रिलोक चन्द जैनमगध सम्राट श्रोणिक भगवान महावीर का उपासक था। एक दिन जब वह जंगल में शिकार खेल रहा था, उसके हाथों एक हिरन मारा गया। इसके बाद उसे ख्याल आया कि इस हिंसा के चलते उसे नरक जाना होगा। वह भगवान के चरणों में आकर बोला, ‘भगवन, क्या हिरन मारने के पाप से
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