फ़िल्म रिव्यू

ज्यादातर टाइम बिजली नहीं आने के बावजूद मोटी रकम के बिजली बिल भरने वाले पीड़ित यूं तो आपको देश के किसी भी इलाके में मिल जाएंगे, लेकिन फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू‘ की कहानी उत्तराखंड के इंडस्ट्रियल इलाके में बिजली कंपनियों की मनमानी पर आधारित है। सुशील कुमार पंत उर्फ एस.के. (शाहिद कपूर), ललिता नौटियाल
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रेणुका व्यवहारेकहानी: ‘मंटो’ मशहूर लेखक सआदत हसन मंटो की लाइफ पर बनी एक बायॉपिक है, जिसमें उनकी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव से लेकर विवाद और खुशनुमा पलों को खूबसूरती से पिरोया गया है। रिव्यू: लेखकों की ज़िंदगी में एक अजीब सा अकेलापन होता है और उस अकेलेपन का साथी उन्हें काल्पनिक कहानियों और किरदारों में मिलता
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ऐसा लगता है जैसे वाशु भगनानी अपने लाडले जैकी को किसी भी तरह से बॉलिवुड स्टार बनाने पर आमादा हैं, पापा ने अब बेटे के लिए करीब आधा दर्जन से ज्यादा फिल्में भी बनाई। इंडस्ट्री के नामचीन डायरेक्टर को भी बेटे का करियर पटरी पर लाने के लिए फिल्मों की कमान सौंपी, बेशक इनमें से
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प्रशांत जैन, नवभारत टाइम्स, Fri,14 Sep 2018 15:24:02 +05:30 हमारी रेटिंग 3.5 / 5 पाठकों की रेटिंग 3.5 / 5 कलाकारबॉयड हॉलब्रुक,ट्रेवांते रोड्स,ओलिविया मून,जेकब ट्रेंबले निर्देशक शेन ब्लैक मूवी टाइपऐक्शन,अडवेंचर अवधि1 घंटा 49 मिनट
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‘लव सोनिया‘ के एक सीन में सोशल वर्कर मनीष (राजकुमार राव) सोनिया (मृणाल ठाकुर) को बचाने के लिए जान की बाजी लगा देता है और उसे बचाने वेश्यालय पहुंच भी जाता है, मगर सोनिया जिस्मफरोशी की उस दलदल से निकलने को राजी नहीं होती। कारण है, उसकी छोटी बहन प्रीति (रिया सिसोदिया) जिसे बचाने के
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‘लव ऐंड रिलेशनशिप्स आर कॉम्प्लिकेटेड’ यानी प्यार और रिलेशनशिप जटिल होते हैं, ये स्टेटस आपने दसियों बार कहीं न कहीं पढ़ा होगा। अनुराग कश्यप निर्देशित और आनंद एल. राय निर्मित ‘मनमर्जियां’ में इसी स्टेट्स को बहुत खूबसूरती और मच्योरिटी के साथ डील किया गया है। फिल्म की कहानी भले प्रेम त्रिकोण जैसे पुराने आइडिया के
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बॉलिवुड में आजकल हॉरर फिल्मों के नाम पर सिर्फ 1920 सीरीज की फिल्में ही आती हैं। ऐसे में भारतीय दर्शकों के पास हॉरर फिल्मों के नाम पर सिर्फ हॉलिवुड की हॉरर फिल्में देखने का ही ऑप्शन है। बेशक वहां भी शैतान से जुड़े ढेरों किस्से हैं, जिन पर हॉलिवुड के निर्माता अक्सर फिल्में बनाते रहते
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ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना चुके डायरेक्टर इम्तियाज अली के भाई साजिद अली के निर्देशन में बनी पहली ही फिल्म बनाना अब तक रिलीज नहीं हो सकी। जॉन अब्राहम की प्रॉडक्शन कंपनी के बैनर तले इस फिल्म के साथ ऐसे कुछ विवाद जुड़े कि यह फिल्म अब तक सिनेमा के पर्दे पर नहीं
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टाइम्स न्यूज नेटवर्क, Fri,7 Sep 2018 09:22:34 +05:30 हमारी रेटिंग 3 / 5 पाठकों की रेटिंग 4 / 5 कलाकारअर्जुन रामपाल,जैकी श्रॉफ,सोनू सूद,हर्षवर्धन राणे,गुरमीत चौधरी,लव सिन्हा,सिद्धांत कपूर निर्देशक जे.पी. दत्ता मूवी टाइपड्रामा,वॉर,हिस्ट्री अवधि2 घंटा 30 मिनट
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लीक से हटकर कुछ अलग ऐसे टॉपिक पर बनी फिल्में आपको पंसद आती है तो यकीनन यह फिल्म आपके लिए है। इस शुक्रवार को दीपेश जैन के निर्देशन में बनी ‘गली गुलियां‘ रिलीज़ हो रही है। चंद मेजर सेंटरों के जिन मल्टिप्लेक्सों में यह फिल्म रिलीज़ हो भी रही है तो यह इक्का-दुक्का स्क्रीन पर
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आजकल के मॉडर्न जमाने में यूं तो भूत-प्रेत की बात पर कोई यकीन नहीं करता, लेकिन फिर भी कुछ चीजें ऐसी हैं, जो सामने पड़ने पर आपको अपने पर यकीन करने के लिए मजबूर कर देती हैं। माना जाता है कि एक खास फेस्टिवल के दौरान कोई रूह एक स्त्री का रूप लेकर घर के
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टाइम्स न्यूज नेटवर्क, Thu,30 Aug 2018 23:05:34 +05:30 हमारी रेटिंग 2.5 / 5 पाठकों की रेटिंग 2.5 / 5 कलाकारधर्मेंद्र,सनी देओल,बॉबी देओल,कृति खरबंदा निर्देशक नवनीत सिंह मूवी टाइपDrama,Comedy अवधि2 घंटा 28 मिनट
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रौनक कोटेचाकहानी: यह कहानी एक ऐसे युवा आईआईटी जीनियस की है, जो रॉ (रिसर्च ऐंड अनैलेसिस विंग) के मिशन को अपने हाथ में लेता है, लेकिन उसका दिल अपनी प्रेमिका के लिए उतना ही धड़कता है जितना देश के लिए। इसलिए उसे कुछ ऐसा करना है जिससे वह अपने देश के साथ-साथ अपनी प्रेमिका को
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हैप्पी के भागने की कहानी का पहला भाग आपने साल 2016 में देखा था। फिल्म सफल रही और तय किया गया कि इसका अगला भाग और भी ज्यादा दिलचस्प बनाया जाए। वैसे अगर आपने फिल्म का पहला भाग नहीं देखा है, तब भी दूसरे भाग से आसानी कनेक्ट हो जाएंगे। पिछली बार हैप्पी पाकिस्तान भाग
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आज के समय में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसी थीमों पर फिल्में सबसे ज्यादा प्रासंगिक हैं। ऐक्शन थ्रिलर ‘सत्यमेव जयते‘ एक ऐसे आदमी की कहानी है जो काफी गुस्से और हिंसा के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता है। फिल्म की कहानी ठीकठाक है लेकिन इसका प्रदर्शन सत्यता से कहीं दूर है। इस मसाला फिल्म
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खेल में अपने देश के झंडे को एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराते हुए देखने से ज्यादा गर्व की बात और क्या हो सकती है। यह भावना और ज्यादा मजबूत हो जाती है क्योंकि घटना 1948 के लंदन ओलिंपिक्स की है जहां भारत को साबित करना है कि 1936 से 1948 तक खेलों में उसका वर्चस्व
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