नन्ही दुनिया

प्रस्तावना : मुंशी प्रेमचंद (जन्म- 31 जुलाई, 1880 – मृत्यु- 8 अक्टूबर, 1936) भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंज़िलों से गुजरा। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत
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बिल्ली भागी कुत्ता भौंका बड़ी जोर से, बिल्ली भागी जान छोड़के। चुहिया ने तब मौज उड़ाई, मजे-मजे से रोटी खाई। जब बिल्ली फिर वापस आई, उसे न चुहिया पड़ी दिखाई। अब तो थी वह बिल के भीतर। मस्त सो रही थी खा-पीकर। लपकू टिम्बक टू भाई टिम्बक टू, लड्डू पर लपके लपकू। लड्डू लपक लिए
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‘भारत रत्न’ से नवाजे गए पूर्व राष्ट्रपति, स्वर्गीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का आज ही के दिन ’27 जुलाई 2015′ को आईआईटी गुवाहाटी में संबोधन के दौरान देहांत हो गया था। दुनिया से चले जाने के बाद भी उनकेकिए गए काम, उनकी सोच और उनका संपूर्ण जीवन देश के लिए प्रेरणास्रोत है। आइए, देश के
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छुट्टी के दिन गजब के बीते हैं, सौ मीटर की रेस हमीं तो जीते हैं। खेलकूद और शेर के चक्कर में, होमवर्क पढ़ाई में थोड़ा पीछे हैं। मैडम अब तो मुझे डांट सुनाएंगी, बच्चों के बीच उठक-बैठक करवाएंगी। जवाब सही दिया तो बच जाऊंगा, वरना निश्चित ही मैं भी मारा जाऊंगा। वैसे मैथ के मेरे
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परिचय : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माता का नाम जगदानी देवी था। उनके पिता ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के थे। यही गुण
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लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माता का नाम जगदानी देवी था। उनके पिता ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के थे। यही गुण चंद्रशेखर को अपने पिता से विरासत में मिले
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पिकासो स्पेन में जन्मे एक बहुत मशहूर चित्रकार थे। उनकी पेंटिंग दुनियाभर में करोड़ों और खरबों रुपए में बिका करती थीं। दुनियाभर के लोग उनकी पेंटिंग के दीवाने थे। एक बार पिकासो किसी काम से कहीं जा रहे थे, तभी वे रात को किसी छोटे शहर में हॉटल में रुके। वहां के लोग उन्हें नहीं
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कूद-कूदकर, उछल-उछलकर, होता है मस्ती का मन। जब बजती छुट्टी की घंटी, टन-टन-टन-टन, टन-टन-टन-टन। पांच पीरियड तक तो तबीयत, हरी-भरी-सी रहती है। पर छठवां आते ही मन में, उलटी गिनती चलती है। दस से होकर शुरू पहुंचती, ताक धिनाधिन, थ्री टू वन। जब बजती छुट्टी की घंटी…! मैम हमारी सबसे अच्छी, हंसकर हमें पढ़ाती हैं।
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छोटा सोचने से क्या फायदा…  एक बार कि बात है एक गांव में एक गरीब लड़का रहता था। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। कई-कई बार तो हालात ऐसे हो जाते थे कि उसके घर में सभी सदस्यों के लिए पेटभर खाना तक नहीं बन पाता था। जैसे-तैसे उसके माता-पिता ने उसे ग्रेजुएशन
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आलू की चड्डी ढीली थी, कुर्ता ढीला बैंगन का। दोनों ही नाराज बहुत थे, हुआ न कुछ उनके मन का। कहा मटर ने अरे मूर्खों, आपस में बदलो कपड़े। ढीले-ढाले कपड़े पहने, व्यर्थ रो रहे पड़े-पड़े। अदला-बदली से दोनों को, सच में मजा बहुत आया। बैंगन को चड्डी फिट बैठी, आलू को कुर्ता भाया।
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1 जुलाई 1882 को पटना (बिहार) जिले के बांकीपुर गांव में डॉ॰ बिधान चंद्र राय का जन्म हुआ था। बिधान चंद्र राय अपने पांचों भाई-बहनों सबसे छोटे थे। उनके पिता का नाम प्रकाशचंद्र राय था। उनके पिता डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे। भारत में 1 जुलाई को उनका जन्मदिन ‘राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस’ के
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इंटरनेशनल जोक्स डे मनाने का मुख्य उद्देश्य हंसना और हंसाना है। आप भी इस दिन जोक्स के जरिए अपने आसपास के लोगों को हंसने पर मजबूर कीजिए। दुनिया भले ही अलग-अलग धर्म और संस्कृति में बंटती हो, लेकिन एक बात दुनियाभर के हर इंसान को एक-दूसरे से जोड़ती है, वह है हास्य-व्यंग्य। हंसी-खुशी, मस्ती-मजाक ऐसे
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एक बार गोलूकार से कहीं जा रहा था, रास्ते में उसे एक ट्रक ने ओवरटेक किया। उस ट्रक के पीछे लिखा था- ‘पढ़ने वाला पागल है।’ यह पढ़ते ही गोलू आग-बबूला हो गया, उसे बहुत गुस्सा आया। उसने तुरंत अपनी कार दौडा़ई और ट्रक को ओवरटेक करके रोका। ….और ट्रक के पीछे जाकर लिख दिया
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अध्यापक (छात्र से)- बताओ! काल कितने प्रकार के होते है। …. छात्र- काल 3 प्रकार के होते है। अध्यापक- ओके, अब बताओ 3 प्रकार के काल कौन से है। छात्र ने जवाब दिया- जी, डायल काल, मिस काल और रिसीव काल।
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पुरूषोत्तम दास टंडन एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, राजनयिक, पत्रकार, वक्ता, समाज सुधारक तथा हिन्दी भाषा के सेवक थे। उनके पिता का नाम सालिकराम था। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान वे कई बार जेल भी गए। वे सरलता, सेवा और सादगी की प्रतिमूर्ति थे। उनका विवाह चंद्रमुखी देवी (मुरादाबाद) के साथ हुआ था। हिंदी को भारत की
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