नन्ही दुनिया

आजादी के महानायक सुभाषचंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे।‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा’, इस नारे को देश की आजादी के लिए ब्रह्म वाक्‍य का रूप देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देश की आजादी के लिए देश से बाहर रहकर संघर्ष किया। उनकी वाणी इतनी
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सुभाषचंद्र बोस के घर के सामने एक बूढ़ी भिखारिन रहती थी। वे देखते थे कि वह हमेशा भीख मांगती थी और दर्द साफ दिखाई देता था। उसकी ऐसी अवस्था देखकर उसका दिल दहल जाता था। भिखारिन से मेरी हालत कितनी अच्‍छी है यह सोचकर वे स्वयं शर्म महसूस करते थे। उन्हें यह देखकर बहुत कष्ट
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23 जनवरी 1897 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाषचंद्र बोस का जन्म कटक के प्रसिद्ध वकील जानकीनाथ तथा प्रभावतीदेवी के यहां हुआ। उनके पिता ने अंगरेजों के दमनचक्र के विरोध में ‘रायबहादुर’ की उपाधि लौटा दी। इससे सुभाष के मन में अंगरेजों के प्रति कटुता
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हिन्दी निबंध- गणतंत्र दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाने वाला भारत का राष्ट्रीय पर्व है, जिसे प्रत्येक भारतवासी पूरे उत्साह, जोश और सम्मान के साथ मनाता है। राष्ट्रीय पर्व होने के नाते इसे हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मनाते हैं। गणतंत्र दिवस : 26 जनवरी सन 1950 को हमारे देश को
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कड़क ठंड में शाला जाना, बहुत कठिन है, बहुत कठिन है। घर से बाहर थोड़ा निकलूं, आज नहीं बिलकुल भी मन है। ओढ़ रजाई सो जाऊंगा, रखो रूम में हीटर एक। थर-थर कांप रहा हूं मम्मी, आकर मुझको जल्दी देख।
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मकर संक्राति तिल गुड़ की मिठास के साथ-साथ पतंगबाजी के उत्साह से भरा पर्व है। लेकिन पतंगबाजी के पेंच लड़ाकर, हर पल रोमांच और खुशि‍यों से भर देने वाला यही पर्व एक ही पल में आपसे सारी खुशि‍यां छीन भी सकता है। जी हां, पतंग उड़ाने के लिए आप जिस मांझे का इस्तेमाल करते हैं,
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मकर संक्रांति खुशियों का पर्व है। लेकिन इस दिन पतंगबाजी के उत्साह में कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सैकड़ों लोग घायल हो जाते हैं। आइए जानें क्या सावधानियां जरूरी है इस खेल से पहले…. 1. सुरक्षि‍त स्थान पर खड़े होकर ही पतंग उड़ाएं। हो सके तो खुले मैदान में जाकर पतंग उड़ाने का
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* स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि जिस पल मुझे यह ज्ञात हो गया कि हर मानव के हृदय में भगवान हैं तभी से मैं अपने सामने आने वाले हर व्यक्ति में ईश्वर की छवि देखने लगा हूं और उसी पल मैं हर बंधन से छूट गया। हर उस चीज से जो बंद रखती है, धूमिल
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंगरेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे। नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को
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मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है, जो सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से
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श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद एक ऐसे संत थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत था। राष्ट्र के दीन-हीनजनों की सेवा को ही वे ईश्वर की सच्ची पूजा मानते थे। इस युवा संन्यासी ने निजी मुक्ति को जीवन का लक्ष्य नहीं बनाया था, बल्कि करोड़ों देशवासियों के उत्थान को ही अपना जीवन-लक्ष्य बनाया। स्वामी
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एक बार कि बात है, एक महात्मा अपने कुछ शिष्यों के साथ पैदल ही यात्रा पर थे। वे चलते-चलते किसी गांव में पहुंच गए। ये गांव काफी बड़ा था, वहां घूमते हुए उन्हें काफी देर हो गयी थी। महात्मा जी थक चुके थे और उन्हें बहुत प्यास लगी थी, तो उन्होनें अपने एक शिष्य से
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उन्नीसवीं सदी के दौर में भारतीय महिलाओं की स्थिति बड़ी ही दयनीय थी। जहां एक ओर महिलाएं पुरुषवादी वर्चस्व की मार झेल रही थीं, तो दूसरी ओर समाज की रूढ़िवादी सोच के कारण तरह-तरह की यातनाएं व अत्याचार सहने को विवश थीं। हालात इतने बदतर थे कि घर की देहरी लांघकर महिलाओं के लिए सिर
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– ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ नए साल! तुम जल्दी आना । संग में अपने खुशियां लाना ।। छोड़ दिए हैं काम अधूरे उसको पूरे करके जाना । स्वप्न सलौने अपने हैं रंगों से है उसे सजाना।। देख रहा हूं मैं तुम को चुस्ती-स्फूर्ति लेकर आना। नए साल! तुम जल्दी आना । संग में अपने खुशियां लाना
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वैसे तो पूरी दुनिया में नया साल अलग-अलग दिन मनाया जाता है, और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी नए साल की शुरूआत अलग-अलग समय होती है। लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी से नए साल की शुरूआत मानी जाती है। क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 31 दिसंबर को एक वर्ष का अंत
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युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी के 94वें जन्मदिवस 25 दिसंबर 2018 विशेष भारत मां के सच्चे सपूत, राष्ट्र पुरुष, राष्ट्र मार्गदर्शक, सच्चे देशभक्त, ना जाने कितनी ही उपाधियों से पुकारे जाने वाले ‘भारत रत्न’ पंडित अटल बिहारी वाजपेयीजी सही मायने में ‘भारत रत्न’ थे। इन सबसे भी बढ़कर पंडित अटल बिहारी वाजपेयीजी एक अच्छे इंसान
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