नन्ही दुनिया

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में सूबेदार रामजी शकपाल एवं भीमाबाई की चौदहवीं संतान के रूप में हुआ था। उनके व्यक्तित्व में स्मरण शक्ति की प्रखरता, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी, सच्चाई, नियमितता, दृढ़ता, प्रचंड संग्रामी स्वभाव का मणिकांचन मेल था। उनकी यही अद्वितीय प्रतिभा अनुकरणीय है। वे एक मनीषी, योद्धा, नायक, विद्वान,
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भीमराव रामजी अंबेडकर, बाबा साहेब अंबेडकर नाम से लोकप्रिय थे। वे भारतीय अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक थे। अंबेडकर भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्ति हैं जिन्होंने दलितों को सामाजिक अधिकार दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। आइए जानें बाबा साहेब अंबेडकर के 20 अनमोल विचार… * मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो
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* राम नवमी : हिन्दी निबंध राम नवमी एक प्रसिद्ध हिन्दू त्योहार है। यह शुक्ल पक्ष ‘या हिन्दू चंद्र वर्ष की चैत्र महीने के नौवें दिन (नवमी) पर मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन को राम नवमी भी कहा
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आज दुनियाभर के हास्य प्रिय और मजाकिया लोगों का दिन ‘अप्रैल फूल डे’ है। मजाकिया किस्म के लोग आए दिन अपने दोस्तों-परिचितों के साथ मजाक करके उन्हें बेवकूफ बनाते हैं। एक अप्रैल का दिन तो और खास है इस दिन मजाकिया स्वभाव का आदमी ही नहीं हर व्यक्ति छोटे-मोटे मजाक करने से नहीं चूकता। कुछ
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1 अप्रैल को दुनियाभर में अप्रैल फूल डे यानी कि मूर्ख दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का तरीका ये होता है कि इस दिन दूसरों से शरारतें कर उन्हें मूर्ख या उल्लू बनाना का प्रयास किया जाता है। खास बात ये है कि इस दिन पर किए गए मजाक का कम ही
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खीर पुड़ी के गए जमाने, लगे बताने दादाजी को, बच्चे सारे ही घर के। भजिए और मुंगेडे हमको, बिल्कुल नहीं सुहाते हैं। हमको तो बस चाऊमीन, नूडल्स गरम ही भाते हैं। दादाजी अब हंस देते।
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नोमू का मुंह पुता लाल से सोमू की पीली गुलाल से कुर्ता भीगा राम रतन का, रम्मी के हैं गीले बाल। मुट्ठी में है लाल गुलाल।। चुनियां को मुनियां ने पकड़ा नीला रंग गालों पर चुपड़ा इतना रगड़ा जोर-जोर से, फूल गए हैं दोनों गाल। मुट्ठी में है लाल गुलाल।। लल्लू पीला रंग ले आया
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जिसे बचाने मुहिम चली है, सिर पर चढ़ा जुनून। नाम बताओ इसका क्या है? भैया अफ़लातून। ठोस द्रव्य या भाप रूप में, रहता है यह भैया। लहरों के संग नदी ताल में, करता ता ता थैया। इसके सेवन से तन मन को, मिलता बड़ा सुकून। शातिर लोग इसे तो अच्छों अच्छों को पिलवाते। साईस इसको
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होली, प्यारभरे रंगों से सजा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय व जाति के बंधन खोलकर भाईचारे का संदेश देता है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूलकर गले लगते हैं और एक-दूजे को गुलाल लगाते हैं। होली एक ऐसा रंग-बिरंगा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते
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– रितु अग्रवाल, महू प्रस्तावना : सदियों से नारी को एक वस्तु तथा पुरुष की संपत्ति समझा जाता रहा है। पुरुष नारी को पीट सकता है, उसके दिल और शरीर के साथ खेल सकता है, उसके मनोबल को तोड़कर रख सकता है, साथ ही उसकी जान भी ले सकता है। मानो कि उसे नारी के
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-डॉ. कामिनी वर्मा ज्ञानपुर (भदोही) उत्तरप्रदेश 10 मई 1857 मेरठ छावनी में सैनिकों के आक्रोश से उत्पन्न संघर्ष भारतीय इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से उल्लिखित है जिसमें शीघ्र ही ब्रिटिश शासकों की शोषणकारी नीतियों और दमनात्मक कार्रवाई से पीड़ित शासक व विशाल जनसमूह व्यापक स्तर पर शामिल हो गया। यद्यपि यह संग्राम
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स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री, देश की पहली महिला गवर्नर, केसर-ए-हिन्द श्रीमती सरोजिनी नायडू उन महिलाओं में से हैं, जिन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए कठिन संघर्ष किया। उन्होंने वर्ष 1925 में आयोजित कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्षता करके ऐसा करने वाली राष्ट्रीय स्तर की चंद महिला नेताओं में अपना नाम शामिल करवाने का सौभाग्य
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रौनक थी बड़ी; हमें कुछ नहीं भाया, मेले में मज़ा नहीं आया। चहल-पहल; धक्का-मुक्की; रेलमपेल, ऊंचे-ऊंचे झूले, बच्चों की रेल, मां के हाथों सा ना किसी ने झुलाया मेले में मज़ा नहीं आया… खाई आलू चाट; पी कोकाकोला, ली ठंडी सोफ़्टी, चूसा बर्फ़ का गोला, पहले जैसा स्वाद नहीं किसी में आया। मेले में मज़ा
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समर्थ रामदास स्वामी महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे। वे महाराजा छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु थे। उनके अमूल्य विचारों से कई महापुरुष भी प्रेरित थे। उनके विचारों ने लोगों और समाज को एक नई दिशा दी। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं उनके 20 अनमोल विचार। आइए जानें… * जो अधर्म करता है और
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सन् 1986 से भारत में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (नेशनल साइंस डे) मनाया जाता है। प्रोफेसर सी.वी. रमन (चंद्रशेखर वेंकटरमन) ने सन् 1928 में कोलकाता में इस दिन एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी, जो ‘रमन प्रभाव’के रूप में प्रसिद्ध है। रमण की यह खोज 28 फरवरी 1930 को प्रकाश में आई
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गोलू स्कूल से घर लौटते ही दादाजी के कमरे की ओर दौड़ा। दादाजी… दादाजी… आपसे एक बहुत ही जरूरी सवाल पूछना है। हांफते हुए बोला। ठीक है भाई पूछ लेना पर पहले थोड़ी देर आराम तो कर लो, अपनी स्कूल की ड्रेस तो बदल लो। फिर एक नहीं दस सवाल पूछ लेना। गोलू अपनी स्कूल
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