नन्ही दुनिया

हमें बताओ कैसे भागे, आप रात की जेल से। आए हो किस रेल से। हमें पता है रात आपकी, बीती आपाधापी में। दबे पड़े थे कहीं बीच में, अंधियारे की कॉपी में। अश्व आपके कैसे छूटे? तम की कसी नकेल से। पूरब की खिड़की का पर्दा, रोज खोलकर आ जाते। किंतु शाम की रेल पकड़कर,
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वर्तमान में हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी है। उनका पूरा नाम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी है। उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ है। भारत के राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। वे स्वतंत्र भारत के 15वें प्रधानमंत्री हैं तथा इस पद पर आसीन
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हिमालय जैसे विराट व्यक्तित्व के धनी हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नरेन्द्र मोदी ऐसी शख्सियत का नाम है, जो कभी भी आलोचनाओं से घबराता नहीं है बल्कि अपनी आलोचनाओं का आत्ममूल्यांकन कर अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश करता है। यही खूबी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दूसरे राजनीतिज्ञों से अलग बनाती है। अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
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भारत में प्रतिवर्ष 15 सितंबर को इंजीनियर डे मनाया जाता है। इस दिन को महान इंजीनियर एम. विश्वेश्वरैया को समर्पित किया गया है और उन्हीं की याद में इस दिन को इंजीनियर दिवस के तौर पर मनाया जाता है। सर एम. विश्वेश्वरैया एक बेहतरीन इंजीनियर थे और उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यों जैसे नदियों के बांध,
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सवाल-क्या बच्चों को सुधारने के नाम पर उनकी पिटाई की जानी चाहिए? जवाब- कतई नहीं, यह तर्क ही गलत है। बच्चों को स्कूल में शिक्षा के साथ ही अनुशासन का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों की ही है। पिटाई, बच्चों को सुधारने का विकल्प नहीं है। काउंसलर्स की सलाह को अमल में लाने के
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प्रिय विद्यार्थियों, स्नेहिल शुभकामनाएं आप आज शिक्षक दिवस मना रहे हैं। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस। कहने को मैं आपकी शिक्षिका हूं, किंतु सच तो यह है कि जाने-अनजाने न जाने कितनी बार मैंने आपसे शिक्षा ग्रहण की है। कभी किसी के तेजस्वी आत्मविश्वास ने मुझे चमत्कृत कर‍ दिया तो कभी किसी विलक्षण
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आज शिक्षा का अर्थ साक्षरता और सूचनात्मक जानकारियों से समृद्ध होना है और आज की शिक्षा का उद्देश्य किसी शासकीय, अशासकीय कार्यालय का वेतनभोगी अधिकारी-कर्मचारी बनना भर है। इस अर्थ में शिक्षा अपने वास्तविक स्वरूप और उद्देश्य से बहुत दूर है और तथाकथित शिक्षित उत्पन्न कर आधी-अधूरी क्षमताओं वाले बेरोजगारों की भीड़ जुटा रही है।
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* शिक्षक – एक अनोखा किरदार शिक्षक ईश्वर का दिया हुआ वह उपहार है, जो बिना किसी स्वार्थ व भेद भाव के अपने हर शिष्य को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने का प्रयास करता है। शिक्षक का दर्जा हमेशा से ही पूजनीय रहा है। एक शिष्य के लिए उसके शिक्षक की बताई हुई बात पत्थर
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– ब्रह्मानंद राजपूत शिक्षक समाज में उच्च आदर्श स्थापित करने वाला व्यक्तित्व होता है। किसी भी देश या समाज के निर्माण में शिक्षा की अहम् भूमिका होती है, कहा जाए तो शिक्षक समाज का आइना होता है। हिन्दू धर्म में शिक्षक के लिए कहा गया है कि आचार्य देवो भवः यानी कि शिक्षक या आचार्य
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मदर टेरसा रोमन कैथोलिक नन थीं जिनके पास भारतीय नागरिकता थी। मात्र 18 वर्ष की उम्र में लोरेटो सिस्टर्स में दीक्षा लेकर वे सिस्टर टेरेसा बनीं थी। उनका जन्म यूगोस्लाविया के स्कॉप्जे में 26 अगस्त 1910 को हुआ था। उनका असली नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू ही था, जो बाद में ‘मदर टेरेसा’ बनीं।  फिर वे
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बिना गुरु के ज्ञान संभव नहीं और बिना ज्ञान के विजय संभव नहीं। जब से इस सृष्टि की संरचना हुई, तब से ही यह परिपाटी पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। जो शिक्षक होते हैं, उन्हें सर्वश्रेष्ठ की श्रेणी में रखा गया है। प्राचीनकाल की गुरुकुल की शिक्षा से लेकर आज की कलयुगी शिक्षा तक का
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भारत व अन्य देशों में समाज निर्माण के लिए शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक एक सभ्य समाज के निर्माण में मजबूत स्तंभ होते हैं। हमारे यहां शिक्षक होना गर्व की बात होती है, इसलिए कई माता-पिता अपने बच्चों को बड़े होने पर शिक्षक बनने की सलाह देते हैं। एक शिक्षक के रूप में करियर
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ज्ञान की बात हो, योग्यता की या फिर बेहतर इंसान होने की, इन सभी मामलों में शिक्षक हमारे जीवन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन ज्ञान के साथ-साथ कुछ और भी योग्यताएं हैं जो एक शिक्षक को अपने आप में बेहतरीन और स्टूडेंट्स का पसंदीदा बनाती हैं। जानिए ऐसी ही 5 खूबियां जो आपको
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वैसे तो टीचर अपने आप में सर्वश्रेष्ठ होता है और उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती। लेकिन चूंकि दुनिया में हर चीज के लिए पैमाने बना दिए गए हैं, तो शिक्षा का क्षेत्र इससे कैसे अछूता रह सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाने का तरीका बेहद मायने रखता है, जो शिक्षक की
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राजा भद्रसिंह प्रजापालक एवं न्यायप्रिय थे। नैतिक और जीवन मूल्यों के प्रति बहुत जागरूक थे किंतु उनका पुत्र महाउत्पाति, विद्रोही, उदंड एवं निर्दयी था। वह प्रतिदिन नए-नए उपद्रवों से लोगों को पीड़ित किए रखता था। राजपुत्र होने के कारण उसकी शिकायत करने की हिम्मत कोई नहीं कर पाता था। इसका फायदा उठाकर वह निरंकुश होता
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हमारी जिंदगी में कुछ लोगों का स्थान ऐसा होता है जिसकी तुलना हम किसी से नहीं कर सकते हैं। हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों में गुरु (शिक्षक) को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। शिक्षक हमें पढ़ना-लिखना सिखाते हैं, सही-गलत में भेदभाव करना और जीवन पथ पर अग्रसर रहने का रास्ता दिखाते हुए हमें ऊंचाइयों
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