‘भारत को अपने कृषि क्षेत्र की मदद करने का पूरा अधिकार’

बिज़नेस

नई दिल्ली

भारत के ‘टैरिफ किंग’ होने के अमेरिका के दावे को इंटरनैशनल ट्रेड एक्सपर्ट्स ने गलत बताया है। उनका कहना है कि भारत के पास एग्रीकल्चर जैसे विशेष सेक्टर्स के हितों की सुरक्षा के उपाय करने का पूरा अधिकार है।

एक्सपर्ट्स ने अमेरिका के इस आरोप को गलत बताया है कि भारत की इंपोर्ट ड्यूटी दुनिया में सबसे अधिक में से एक है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपियन यूनियन और अमेरिका सहित कई विकसित देशों और रीजन में एग्रीकल्चर प्रॉडक्ट्स पर बहुत अधिक टैरिफ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कहते रहे हैं कि भारत एक ‘टैरिफ किंग’ है और वह अमेरिकी प्रॉडक्ट्स पर बहुत अधिक इम्पोर्ट ड्यूटी लगाता है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में इकनॉमिक्स के प्रोफेसर बिश्वजीत धर ने कहा कि अमेरिका के आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने बताया, ‘वास्तव में अमेरिका में कई प्रॉडक्ट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी बहुत अधिक है। तंबाकू पर लगभग 350 पर्सेंट और मूंगफली पर 164 पर्सेंट ड्यूटी है।’

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) के प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी का कहना था कि अमेरिका के आरोप सही नहीं हैं और वास्तव में अमेरिका को एक विकसित देश होने के कारण अपने ड्यूटी स्ट्रक्चर को संतुलित बनाने की जरूरत है।

ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि ट्रंप का भारत पर ‘टैरिफ किंग’ का आरोप सच नहीं है। उन्होंने बताया, ‘अन्य देशों की तरह भारत के पास भी विशेष सेक्टर्स में हितों की सुरक्षा के लिए उपाय करने का अधिकार है। बहुत से देशों में भारत की तुलना में कहीं अधिक टैरिफ है। WTO का सदस्य होने के कारण भारत स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूर्वानुमान के योग्य व्यापार को लेकर प्रतिबद्ध है।’ सिंगला ने बताया कि जापान विशेष उत्पादों पर 736 पर्सेंट जबकि दक्षिण कोरिया 807 पर्सेंट तक ड्यूटी लगाता है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गनाइजेशन (FIEO) का कहना है कि अल्कोहोलिक बेवरेजेज पर 150 पर्सेंट, कॉफी पर 100 पर्सेंट और ऑटोमोबाइल पर 60-75 पर्सेंट के ऊंचे टैरिफ के कारण ट्रंप की नजरों में भारत एक खलनायक बन गया है।

FIEO के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने बताया कि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपियन यूनियन सहित बहुत से देश एग्रीकल्चर प्रॉडक्ट्स पर बहुत अधिक टैरिफ लगाते हैं।

एक अन्य एक्सपर्ट ने कहा कि अमेरिका को भारत जैसे विकासशील देशों पर टैरिफ को लेकर भेदभाव का आरोप नहीं लगाना चाहिए क्योंकि अमेरिका 60,000 डॉलर प्रति वर्ष की प्रति व्यक्ति आमदनी के साथ दुनिया के सबसे धनी देशों में से एक है।

अमेरिका ने GSP के तहत भारतीय निर्यातकों को मिलने वाले इंसेंटिव हाल ही में वापस लेने का फैसला किया था। हालांकि, भारत ने कहा है कि इससे निर्यातकों पर अधिक असर नहीं पड़ेगा क्योंकि ये लाभ लगभग 19 करोड़ डॉलर प्रति वर्ष का ही था।

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