मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव परिणाम आए नहीं, कांग्रेस का मंत्रिमंडल तैयार!

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भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने मतगणना से पहले ही प्रदेश में सरकार बनाने का दावा एक बार फिर कर दिया है. इस बार कमलनाथ ने कांग्रेस को 140 सीटें मिलने की बात कही है. हालांकि नतीजों से पहले बुलाई गई इस बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया, अरुण यादव जैसे कई नेता मौजूद नहीं थे. कुछ उम्मीदवारों ने भावी मुख्यमंत्री के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया तो कुछ ने कमलनाथ का नाम गिनवा दिया.
       
मध्यप्रदेश की नई विधानसभा की तस्वीर 11 दिसंबर को तय होगी, लेकिन नतीजों से पहले कांग्रेस ने अपने मंत्री, विधायक सब चुन लिए हैं. बस मुख्यमंत्री के नाम पर खींचतान बची रही गई. तीन गुट आपस में भिड़े हुए हैं.

कोलारस से विधायक और उम्मीदवार महेन्द्र यादव ने खुलकर कहा युवा चेहरा, सिंधिया जी बनेंगे. जब उनसे पूछा गया कि सिंधिया तो चुनाव लड़े नहीं, तो यादव ने कहा हम छोड़ेंगे सीट सिंधिया जी के लिए. सब चाह रहे हैं नया चेहरा आएगा सिंधिया जी बनें. वहीं पार्टी के दूसरे नेता नीलेश अवस्थी ने पूरे आत्मविश्वास से कहा सरकार बन चुकी है, लगभग 145 सीटें आएंगी हमारी. माननीय कमलनाथ जी मुख्यमंत्री बनेंगे.

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कांग्रेस ने ये क्लास रखी थी मतगणना की ट्रेनिंग के नाम पर लेकिन उम्मीदवारों का रवैया भावी विधायक, मंत्री वाला था. पार्टी अध्यक्ष कमलनाथ ने भी 140 का आंकड़ा दे दिया. बस मुख्यमंत्री का फैसला आलाकमान पर छोड़ा. कहा- मैंने कह दिया 140 विधायक जीतेंगे. मुख्यमंत्री के सवाल पर उन्होंने कहा यह राहुल जी तय करेंगे.

 

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कांग्रेस की बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरुण यादव समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद नहीं थे.

कमलनाथ ने यह भी तय कर लिया है कि प्रशासनिक पदों के नाम में भी कमलनाथ बदलाव करेंगे और सरकार बनते ही कलेक्टर का नाम बदल दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत है. कलेक्टर क्यों कहा जाता है, ये तो अंग्रेजों का दिया शब्द है. कलेक्शन करते थे तो कलेक्टर कहने लगे. ऐसी चीजों को बदलने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा मैं कलेक्टरों से पूछूंगा कि उनका क्या नाम रखा जाए. ऐसा बहुत कुछ बदला जाएगा, सरकार में आते ही कलेक्टर जैसे पदों के नाम बदले जाएंगे.     
 
कांग्रेस की इस जल्दबाजी पर बीजेपी चुटकी ले रही है. बीजेपी प्रवक्ता हिदायतुल्लाह शेख ने कहा ये 15 साल से लड़ ही रहे हैं. पिछले चुनाव में भी ऐसी ही स्थिति थी. खुद को प्रोजेक्ट करने में लगे हैं. सिंधिया जी की बड़ी प्रबल इच्छा है, लेकिन जनता बनाती है. राजा महाराजा की मर्जी से नहीं चलता है. जनता किसी को आशीर्वाद देती है. पूरे राज्य में एकमात्र व्यक्ति को आशीर्वाद मिला है, वो हैं शिवराज जी.

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सरकार किसकी बनेगी यह तय तो 11 दिसंबर को होगा लेकिन कांग्रेस अभी से ताल ठोकने लगी है. हालांकि इस कांग्रेसियों की क्लास से ज्योतिरादित्य सिंधिया का नदारद रहना, मंच पर लगे पोस्टर से भी सिंधिया की अनुपस्थिति काफी कुछ बयां कर गई. इससे पहले भी ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ को मुख्यमंत्री घोषित करने का अभियान उनके समर्थक चला चुके हैं.

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