डीयू ने कुलपति का हाजिरी रिकॉर्ड देने से मना किया, कहा यह ‘निजी’ है

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नई दिल्‍ली: दिल्ली विश्वविद्यालय ने कुलपति समेत अपने प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति के संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया है. विश्वविद्यालय ने कहा कि सूचना ‘लोक हित’ में नहीं है और यह ‘निजता में हनन’ का मामला होगा. वहीं प्रशासन के विरुद्ध संघर्ष कर रहे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के शिक्षकों को चेतावनी दी गई है कि उनकी छुट्टियां स्वीकृत नहीं की जाएंगी अगर वे अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगे. यह संघर्ष एक वर्ष पहले तब शुरू हुआ, जब एक व्यक्ति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंस रजिस्ट्रार और अन्य समेत गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत उपस्थिति जानकारी मांगी.

विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) का हवाला देते हुए कहा, “यह प्रतीत होता है जहां तक खास अधिकारी का सवाल है कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी निजी प्रकृति की है और यह किसी की निजता में अनाधिकृत रूप से दखल होगा. इसके साथ ही यह प्रतीत होता है कि इस सूचना के खुलासे से किसी भी प्रकार का लोक हित नहीं होगा.”

विश्वविद्यालय के पहले अपीलीय प्राधिकार ने इस निर्णय के साथ सहमति जताई थी. प्राधिकार ने सितंबर में मामले की सुनवाई की थी. जेएनयू विश्वविद्यालय और इसके शिक्षकों के बीच चल रहे मौजूदा संघर्ष के मद्देनजर यह प्रगति काफी महत्वपूर्ण है. यहां शिक्षकों ने अपने अकादमिक स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाने का आरोप लगाते हुए उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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