भोपाल में तबाही, जानें कितनी खतरनाक MIC

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भोपाल में मचाई तबाही, जानें कितनी खतरनाक MIC

Web Title:know how much danger is methyl isocyanate which was responsible for bhopal gas tragedy

(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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​भोपाल में मचाई तबाही, जानें कितनी खतरनाक MIC

2 दिसंबर, 1984 भोपाल के लिए तबाही का दिन था। यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट का रिसाव हुआ था और कुछ घंटे के अंदर लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हजारों लोगों की मौत हो गईं और लाखों लोग बुरी तरह प्रभावित हुए। कई जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो गए तो कुछ की आने वाली नस्लों तक पर इसका असर पड़ रहा है। आइए आज हम तबाही का मुख्य कारण रहे मिथाइल आइसोसाइनेट (Methyl isocyanate-MIC) के बारे में जानते हैं…

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​क्या है मिथाइल आइसोसाइनेट

​क्या है मिथाइल आइसोसाइनेट

मिथाइल आइसोसाइनेट एक ऐसा लिक्विड है जिसका कोई रंग नहीं होता है। बहुत ही कम तापमान में यह उबलने लगता है। यह काफी ज्वलनशील भी है यानी हवा के संपर्क में आते ही यह जलने लगता है। इसकी बहुत तेज गंध होती है।

इसका इस्तेमाल कीटनाशक और प्लास्टिक तैयार करने में किया जाता है।

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​पर्यावरण में प्रवेश करने पर क्या होता है?

​पर्यावरण में प्रवेश करने पर क्या होता है?

जब मिथाइल आइसोसाइनेट को हवा में छोड़ा जाता है तो यह सिर्फ गैस रूप में ही रहती है। हवा में ज्यादा समय तक इसका अस्तित्व नहीं रहता है। हवा के अंदर पाए जाने वाले पदार्थ इसके साथ प्रतिक्रिया करके इसे बदल देते हैं। बादलों या बारिश के पानी की नमी से भी यह गैस अन्य पदार्थों में टूट जाती है। वायुमंडल में यह कुछ घंटे या कुछ दिनों तक ही रहती है। अगर मिट्टी में मिले तो वहां भी नमी इसका विघटन कर देती है। मिथाइल आइसोसाइनेट खाद्य श्रृंखला में संचयित नहीं होती है।

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​शरीर में कैसे प्रवेश करती है?

​शरीर में कैसे प्रवेश करती है?

सिगरेट या बीड़ी से निकलने वाले धुएं में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस पाई जाती है। अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है या सिगरेट और बीड़ी से निकलने वाले धुएं से शरीर में मिथाइल आइसोसाइनेट प्रवेश कर सकती है। जहां इसका उत्पादन हो या फिर इस्तेमाल किया जाता है, वहां पर खुले में सांस लेने और या छूने से भी शरीर में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस प्रवेश कर सकती है। वैसे किसी फैक्ट्री के आसपास रहने पर इसकी हल्की मात्रा सांस के साथ अंदर जाती है।

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​स्वास्थ्य पर कितना असर?

​स्वास्थ्य पर कितना असर?

मिथाइल आइसोसाइनेट इंसान के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, वह भोपाल गैस त्रासदी से ही पता चल गया। वैसे शरीर में प्रवेश करने वाली इसकी मात्रा के हिसाब से इंसान प्रभावित होता है। अगर बहुत ही कम मात्रा में गैस का आपके शरीर में प्रवेश हुआ है तो आंख में जलन और गले में खराश महसूस होगा जिससे आपको खांसी या छींक आएगी। ज्यादा मात्रा होने पर फेफड़े में सूजन आ जाती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार फेफड़े को इतना ज्यादा नुकसान पहुंच जाता है कि इंसान मर भी जाता है। अगर गैस या लिक्विड आफके स्किन या आंख में पड़े तो जलन होगा। इससे आंख को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है, कई मामले में तो स्थायी रूप से लोग अंधे भी हो जाते हैं।

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​कैंसर की संभावना

​कैंसर की संभावना

एमआईसी की वजह से कैंसर हो सकता है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अभी तक किसी स्टडी में कैंसर और एमआईसी के बीच कोई संबंध सामने नहीं आया है।

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​बच्चों के लिए कितना खतरनाक?

​बच्चों के लिए कितना खतरनाक?

बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका क्या खास असर पड़ता है, ऐसी कोई स्टडी अभी नहीं हुई है। ऐसी संभावना है कि जिस तरह का असर वयस्कों पर होता है, वैसा ही असर बच्चों के स्वास्थ्य पर होता है। वैसे गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं के शरीर में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस प्रवेश की तो उनके बच्चों की मौत हो गई। जानवरों पर हुए अध्ययन से पता चला है कि इसकी वजह से भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है।

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​आपके शरीर में तो नहीं MIC?

​आपके शरीर में तो नहीं MIC?

जानवरों के अध्ययन से पता चला है कि आपके खून या यूरीन में अगर मिथाइल आइसोसाइनेट की मात्रा हो तो उसका पता लगाया जा सकता है। वैसे इसका पता लगाने के लिए कोई खास टेस्ट नहीं है। अगर आपको ऐसा लगता है कि मिथाइल आइसोसाइनेट आपके शरीर में प्रवेश कर गया है तो छाती का एक्स-रे, खून की जांच और सांस से जुड़ीं जांचें करानी होंगी। उससे ही पता चल पाएगा कि कहीं आपके फेफड़ों को तो नुकसान नहीं पहुंचा है।

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