NBFC की सुस्ती से सिंगल डिजिट में रह सकती है टोटल लोन ग्रोथ

[ ईटी ब्यूरो | मुंबई ]

नॉन बैंकिंग फाइनेंस सेक्टर में सुस्ती के चलते लोन की उपलब्धता घट सकती है और टोटल लोन ग्रोथ सिंगल डिजिट में रह सकती है। क्रेडिट सुईस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी बैंकों को पूंजी की कमी बनी हुई है जबकि प्राइवेट बैंक के पास नकदी की कमी है। बैंकों की लोन ग्रोथ दो साल से औसतन 7% रही है जबकि एनबीएफसी की 20% से ज्यादा लोन ग्रोथ के चलते टोटल लोन ग्रोथ 10% से ज्यादा रही है।

क्रेडिट सुईस अपनी रिपोर्ट में लिखती है, ‘ग्रोथ में स्लोडाउन के चलते NBFC के प्रीमियम वैल्यूएशन में कमी आ सकती है। उन स्टॉक्स को लेकर हम सावधानी बरत रहे हैं जिनमें ऊंचे पी/ई पर ट्रेड हो रहा है और जिन्होंने शॉर्ट रिफाइनेंसिंग के लिए MF से फंड लिया हुआ है।’ पिछले कुछ साल से फंड के लिए म्यूचुअल फंड्स पर हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और NBFC की निर्भरता बढ़ गई है।

बैंकों का NBFC में 5.9 लाख करोड़ रुपये का डेट एक्सपोजर है। NBFC के सपोर्ट के लिए SBI आगे तो आया है लेकिन इससे उसका रिस्क वेट बढ़ेगा और ज्यादा पूंजी की जरूरत होगी। बैंकों के इनक्रीमेंटल लोन में NBFC का हिस्सा 20 पर्सेंट है। बैंक NBFC को जो लोन देते हैं उसका रिस्क वेट 35% होता है। ऐसे में NBFC को एडिशनल लोन देने पर लोन की खपत लगभग दोगुना हो जाएगी।

एनबीएफसी में सुस्ती आने की दो बड़ी वजहों में एक नकदी की कमी और दूसरी फंड की अनुपलब्धता है। NBFC के डेट में म्यूचुअल फंड्स का हिस्सा उनके टोटल डेट एयूएम का 30% है। क्रेडिट सुईस की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। उनका लगभग 55% एक्सपोजर शॉर्ट टर्म का है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अगले दो महीनों में बड़े पैमाने पर डेट सिक्योरिटीज मैच्योर हो रही हैं जो एनबीएफसी के लिए बड़ी चुनौती होगी। दरअसल बहुत सी एनबीएफसी की उधारी में म्यूचुअल फंड्स की 25 से 40% हिस्सेदारी है।’ इसमें से 15-35% उधारी अगले छह महीनों में मैच्योर हो जाएगी।

NBFC और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में किया गया म्यूचुअल फंड्स का डेट इनवेस्टमेंट अक्टूबर से मार्च तक मैच्योर होगा। इनमें 80,000 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट अक्टूबर जबकि नवंबर में 77,000 करोड़ रुपये के डेट इनवेस्टमेंट्स की मैच्योरिटी होनेवाली है।

क्रेडिट सुईस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जहां तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की बात है तो इस सेक्टर में कुछ स्कीमों का एक्सपोजर मैक्सिमम लेवल तक पहुंच गया है। इसलिए उसमें कुछ करेक्शन हो सकता है। NBFC में आधे से ज्यादा म्यूचुअल फंड एक्सपोजर शॉर्ट टर्म कमर्शियल पेपर के जरिए है। अगले कुछ महीनों में इनकी मैच्योरिटी NBFC के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।’

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