#MeToo कैंपेन के समर्थन में स्‍मृति, उमा और मेनका, अब सवाल क्या एमजे अकबर विदेश राज्य मंत्री बने रहेंगे?

ताज़ातरीन

नई दिल्ली: महिला पत्रकारों के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों से घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर अब रविवार को देश लौटेंगे. उन पर इस्तीफ़े के दबाव की ख़बर को केंद्र सरकार के सूत्रों ने ख़ारिज करते हुए कहा कि विदेश दौरे से लौटने पर उनका पक्ष सुना जाएगा. उन्हें ख़ुद इस पर फ़ैसला लेना चाहिए. अब सवाल ये है कि क्या यौन उत्पीड़न के इतने सारे आरोपों के बावजूद एमजे अकबर विदेश राज्य मंत्री बने रहेंगे? अब तक करीब 10 महिलाओं ने उनके खिलाफ लिखा है. इस मामले में सरकार में महिलाओ के अंदर असंतोष की बात सामने आ रही है. साथ ही साफ़ है कि केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि उन्हें ख़ुद सफाई देनी चाहिए. उमा भारती और मेनका गांधी भी #MeToo कैंपेन का समर्थन कर रही हैं. आपको बता दें कि स्मृति ईरानी से पहले उमा भारती और मेनका गांधी भी मी टू के समर्थन में बोल चुकी हैं. 

इस मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज मंगलवार को एमजे अकबर से जुड़े सवाल से बचती दिखीं. हालांकि तब तक अकबर पर इतने सारे इल्ज़ाम नहीं थे. बुधवार को रविशंकर प्रसाद ने भी इस सवाल का जवाब देने से इनकार किया. लेकिन गुरुवार को भी बीजेपी नेताओं और मंत्रियो से ये सवाल पूछा जाता रहा कि दस महिलाओं के आरोप के बावजूद क्या एमजे अकबर अपने ओहदे पर बने रहेंगे? संबित पात्रा ने फिर जवाब नहीं, दिया लेकिन स्मृति ईरानी ने साफ़ कहा कि इस मुद्दे पर विदेश राज्य मंत्री को ख़ुद सफाई देनी चाहिए. यही नहीं, उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ बोलने वालों का मज़ाक नहीं बनाया जाना चाहिए.  केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्हें ख़ुद बताना होगा. मैं वहां थी नहीं और उनकी महिला सहकर्मियों को तंग करना ज़्यादती होगी, लेकिन इतना कहूंगी कि जो आवाज़ उठा रही हैं उनका मज़ाक़ नहीं उड़ाना चाहिए.

टिप्पणियां


स्मृति ईरानी से पहले उमा भारती और मेनका गांधी भी मी टू के समर्थन में बोल चुकी हैं. यानी पुरुष मंत्री जो कहें, ज़्यादातर महिला मंत्रियों के बीच ये मुद्दा बना हुआ है. एमजे अकबर अपने अफ्रीकी दौरे पर हैं और उन्होंने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है. न उनके मंत्रालय ने कुछ कहा है, लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि अगर महिलाएं उन्हें लिखें तो वो सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेंगी.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि आप जिस शख़्स का नाम ले रही हैं अगर महिलाओं ने शिकायत की तो हम ऐसा करेंगे. अहम बात ये है कि आरएसएस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले दत्तात्रेय होसबोले ने मीटू के पक्ष में ट्वीट करने में कोई हिचक नहीं दिखाई. सवाल है, क्या इन सबके बावजूद वे केंद्र सरकार में बने रह पाएंगे? वहीं यूपी सरकार की मंत्री रीता रीता बहुगुणा जोशी ने कहा है कि सवाल इस्‍तीफे का नहीं है. सवाल ये है कि आरोप लगे तो सीधे हों, तो आरोप लगाने का हक महिलाओं का है पर जांच भी होनी चाहिए. मीटू कैंपेन में निश्चित रूप से हर व्‍यक्ति अपना-अपना पक्ष रख रहा है. महिला ने अपना पक्ष रखा है और पुरुष को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है तो देखते हैं कि कैसे होता है. 
 

Products You May Like

Articles You May Like

Gully Boy Review: गरीबी-तंगी में रहने वाले ‘रैपर’ का बड़ा सपना, ‘गली बॉय’ की दमदार कहानी
27 साल बाद हर्षद मेहता के परिवार से की गई टैक्स डिमांड खारिज
आर्सेलरमित्तल ने एस्सार महान के लिए की 4,800 करोड़ रुपये की पेशकश
असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिये तीन हजार रुपये मासिक पेंशन सुविधा देने वाली योजना शुरू
एफडीआई नीतियों में बदलाव से नहीं हिला भारत को लेकर हमारा भरोसा: वालमार्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *