वृश्चिक राशि में गुरु का संचार, इन उपाय से पाएं लाभ

राशि


वैदिक शास्त्रों के अनुसार, बृहस्पति ग्रह देवता के गुरु हैं और उन्हें जीवन में उन्नति का कारक माना जाता है। 11 अक्टूबर को ही एक साल के लिए वृश्चिक राशि में गुरु का संचार हुआ है। गुरु के शुभ प्रभाव से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती। गुरु जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होते हैं। अगर गुरु अशुभ ग्रह के प्रभाव में आ जाते हैं तो वह बुरे प्रभाव भी देते हैं। इसलिए गुरु दोष से बचने के लिए कुछ धार्मिक उपाय बताए गए हैं। इन उपाय से गुरु के अनुकूल बनाया गया है…

1/5इस तरह करें मजबूत

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु को अनुकूल बनाने के लिए गरीब, जरूरतमंद और ब्राह्मण को भोजन और दान करें। ऐसा करने से गुरु मजबूत होंगे और इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आएगी।

2/5व्रत का लें संक्लप

गुरुवार के दिन सबसे पहले व्रत का संकल्प लें और साफ पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उसपर गुरु की प्रतिमा स्थापित करें। पूजन में केसरिया, चंदन, पीले फूल, पीले पकवान आदि अर्पित करें। साथ ही गाय को गुड़ और चना अवश्य खिलाएं।

3/5इस रंग के कपड़े पहनें

गुरुवार व्रत में पीले कपड़े धारण करें और बिना नमक का भोजन करें। भोजन में कम से कम एक पीली वस्तु जरूर रखें। गुरु ग्रह को पीली वस्तु से ही भोग लगाएं।

4/5पीली चीजें का करें दान

गुरुवार के दिन गरीबों को पीली वस्तुओं का दान जरूर करना चाहिए। इनमें आप पीले फल, केले, सोने की कोई छोटी चीज, चने, पीले चावल आदि कर सकते हैं। वहीं आप गुरु के कृपा आप पर सदैव बनी रहे इसके लिए गुरुवार के दिन पानी हल्दी डालकर जरूर नहाएं।

5/5गुरु मंत्र का करें जप

गुरु का बीज मंत्र – ओम ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
गुरु का वैदिक मंत्र – ओम बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेधु। यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविण देहि चित्रम।। मंत्र का 19,000 बार जप करें।
गुरु गायत्री मंत्र – ओम अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरु: प्रचोदयात्! मंत्र को भी 19,000 बार जप करें।

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