J&K निकायः आतंकी धमकी के बीच वोटिंग शुरू

देश

निकाय चुनाव के लिए हो रही वोटिंग
हाइलाइट्स

  • पहले चरण के तहत 422 वार्डों में सोमवार को मतदान
  • केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 400 अतिरिक्त कंपनियां राज्य में तैनात
  • 10 अक्टूबर को दूसरे चरण में 384 वार्ड के लिए चुनाव
  • नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी सहित कई पार्टियों ने किया है बहिष्कार
  • हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक नजरबंद

श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर में नगर निकाय चुनाव के पहले चरण में सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग शुरू हो गई है। अलगाववादियों के बंद की घोषणा को देखते हुए सुरक्षाबल विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। पहले चरण में करीब एक दर्जन जिलों के 422 वार्डों में वोट डाले जा रहे हैं। उधर, चुनाव से पहले ही आतंकियों ने मतदाताओं और उम्मीदवारों को चुनावों से दूर रहने की धमकी दी है। इसे देखते हुए राज्यभर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

उमर फारूक नजरबंद, कड़ी सुरक्षा में उम्मीदवार

केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की 400 अतिरिक्त कंपनियां राज्य में पहुंच चुकी हैं। प्रशासन ने उम्मीदवारों को सुरक्षित जगहों पर रखा है और भयमुक्त चुनाव कराने का दावा किया है। उधर, चुनावों का बहिष्कार करने वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है।

बता दें कि कि पहले चरण के तहत सोमवार को 1,283 उम्मीदवार मैदान में हैं। पहले चरण में जम्मू के 247 वार्ड, कश्मीर में 149 और लद्दाख के 26 वार्ड में चुनाव हो रहे हैं। 10 अक्टूबर को दूसरे चरण में 384 वार्ड, तीसरे चरण में 13 अक्टूबर को 207 वार्ड, और 16 अक्टूबर को आखिरी चरण में 132 वार्डों में वोट डाले जाएंगे। मतगणना 20 अक्टूबर को होगी। जम्मू और श्रीनगर नगर निगमों समेत प्रदेश में कुल 1,145 वार्डों के लिए चार चरणों में होने वाले चुनाव के लिए 2,990 उम्मीदवार मैदान में हैं। जम्मू क्षेत्र से कुल 2,137 उम्मीदवार मैदान में हैं जबकि श्रीनगर से 787 उम्मीदवार और लद्दाख क्षेत्र से 66 उम्मीदवार मैदान में हैं। कश्मीर घाटी में 231 और जम्मू में 13 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

पढ़ें: J&K: 215 वार्ड्स में निर्विरोध निर्वाचित, बीजेपी को फायदा

मुख्य पार्टियों का बहिष्कार

राज्य की दो प्रमुख पार्टियों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के चुनावों का किया है। इसके अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, हाकिम यासीन के नेतृत्व वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) और गुलाम हसन मीर की अध्यक्षता वाली डेमोक्रेटिक पार्टी नैशनलिस्ट (डीपीएन) समेत मुख्य राजनीतिक दलों ने भी इन चुनावों से अलग रहने का फैसला किया है।


संवेदनशील जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक


इसके अलावा प्रदेश के तमाम संवेदनशील जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई गई है। निकाय चुनाव के दौरान घाटी में किसी बड़े आतंकी हमले की आशंका में सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा श्रीनगर समेत तमाम जिलों में सुरक्षा ड्यूटी के लिए सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। साथ ही जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला, शोपियां और पुलवामा जिलों में वाहनों की चेकिंग के लिए पुलिस नाके लगाए गए हैं।

मतदान केंद्रों पर सख्त सुरक्षा प्रबंधन

कश्मीर घाटी में पंचायत और निकाय चुनाव के लिए नामांकन करने वाले तमाम प्रत्याशियों को पूर्व में आतंकी संगठनों द्वारा धमकियां दी गई हैं, जिसे देखते हुए सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों को सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक मतदान की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, साथ ही मतदान केंद्रों की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात किए गए हैं।

शोपियां जिले के कई गांवों में तलाशी अभियान

जम्मू-कश्मीर में निकाय चुनाव से एक दिन पहले दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकियों की तलाश के लिए सेना ने बड़ा अभियान शुरू किया है। सेना की टीमों ने शोपियां के गनोपोरा, वारथू, बालापोरा, शिरामल और अन्य गावों की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस की एसओजी और सीआरपीएफ की टीम शामिल हो रही हैं।

मीरवाइज उमर फारूक को किया नजरबंद

जम्मू कश्मीर में शहरी स्थानीय निकाय के पहले चरण के चुनाव से पहले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को रविवार को नजरबंद कर दिया गया। इससे पहले पुलिस ने दो अक्टूबर को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक को एहतियाती तौर पर हिरासत में ले लिया था। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी की नजरबंदी जारी रहेगी।


अलगाववादी नेताओं ने किया है बहिष्कार


फारूक ने ट्वीट किया, ‘नजरबंद हूं। चुनाव की विचित्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है। बड़ी संख्या में बल तैनात किए गए हैं। पीएसए लगाने, लोगों को कैद और नजरबंद करने, छापेमारी करने, पाबंदियां लगाने और इंटरनेट पर रोक लगाने की प्रक्रिया तेज हुई है। यह जिक्र नहीं करना चाहिए कि उम्मीदवार नामालूम हैं और जनता हैरान है। लोकतंत्र का क्या मजाक उड़ाया जा रहा है।’ तीनों अलगाववादी नेताओं ने सोमवार से शुरू हो रहे चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।

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