और बुखार उतर गया

विचार

एक दिन महात्मा गांधी लोगों से कुछ बातचीत कर रहे थे, तभी एक युवक उनके पास आया और श्रद्धावश गांधी जी को नमस्कार करते हुए उनके चरणों में झुक गया। उसे अपने चरणों में झुकते देख कर गांधी जी ने पूछा, ‘भाई, क्या बात है? क्या किसी समस्या का समाधान चाहते हो?’ यह सुनकर युवक बोला, ‘महात्मा जी, मेरी समस्या का समाधान तो मात्र आपका नाम लेने से ही हो गया। कई दिनों से मैं ज्वर से पीड़ित था। दवाई भी चल रही थी, लेकिन जैसे ही मैंने आपका नाम लिया, वैसे ही ज्वर तेजी से उतर गया। अब मैं स्वस्थ महसूस कर रहा हूं। आप सचमुच चमत्कारी हैं। मात्र आपका नाम लेने से जब बुखार उतर सकता है तो अन्य समस्याएं तो स्वतः ही सुलझ जाएंगी। मैं आपका शुक्रिया अदा करने आया हूं।’

यह कहकर उसने गांधी जी के पास कुछ रुपये रख दिए और बोला, ‘मेरी तरफ से यह भेंट स्वीकार करें।’ गांधी जी ने उसके रुपये लौटाते हुए बोले, ‘भाई, माना कि मुझे याद करने से आपका बुखार उतर गया। इसलिए आप मुझे चमत्कारी मान रहे हैं। यदि आपका बुखार नहीं उतरता तो फिर तो आप मुझे जी भरकर कोसते। किसी व्यक्ति का स्मरण करने से बुखार दूर हो जाएगा, या समस्या का हल हो जाएगा- यह मात्र मन का वहम और अंधविश्वास है। मैं अंधविश्वास की ऐसी या कैसी भी धारणा को नापसंद करता हूं। कृपा करके आप मेरे नाम का स्मरण न करके अपने कर्म में विश्वास रखें तो ज्यादा अच्छा होगा। आपका बुखार मेरा नाम स्मरण करने से दूर नहीं हुआ है, अपितु आपके द्वारा भली-भांति इलाज करने से दूर हुआ है।’ गांधी जी की बातें सुनकर युवक ने निश्चय किया कि वह अपने मन में अंधविश्वास की धारणा नहीं पालेगा। उसने वहीं संकल्प लिया कि वह अंधविश्वास से आजीवन लड़ेगा।

संकलन : रेनू सैनी

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