जीत और सबक

विचार

टीम इंडिया ने सातवीं बार एशिया कप चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है। जाहिर है, इससे खिलाड़ियों में उत्साह है, लेकिन टीम को ठहरकर इस टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन का आकलन जरूर करना चाहिए। क्या एशिया कप में भारत ने ऐसा प्रदर्शन किया जिससे आश्वस्त होकर कहा जा सके कि वह विश्व कप क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार है?

दरअसल अब हर टूर्नामेंट और सीरिज को वर्ल्ड कप की तैयारी के रूप में ही देखा जा रहा है। एशिया कप में हमारे प्रदर्शन को उसी संदर्भ में देखने की जरूरत है। सच कहा जाए तो पाकिस्तान को छोड़कर किसी भी टीम के खिलाफ भारतीय खिलाड़ी बहुत सहज नहीं दिखे। हॉन्ग कॉन्ग, अफगानिस्तान और बांग्लादेश ने हमें कड़ी चुनौती पेश की। फाइनल में तो हम बाल-बाल बच गए। ये टीमें पहले अपनी पकड़ बनाकर बाद में लड़खड़ा गईं। कहा जा सकता है कि टीम इंडिया अपने बेहतर प्रदर्शन की बजाय अपने विपक्षियों की कमजोरी या अनुभवहीनता की वजह से जीत गई। जबकि टीम इंडिया का सामना अपनी रैंकिंग से कहीं नीचे की टीमों से हुआ।

साफ है कि अभी भी हमारी तैयारी पुख्ता नहीं है। हमें हर विभाग में एक संतुलन बनाना होगा। शीर्ष क्रम तो मजबूत हो चुका है, लेकिन मिडल ऑर्डर को लेकर संशय बना हुआ है। उसमें लगातार प्रयोगों का दौर जारी है। नंबर चार पर तो छह-सात खिलाड़ियों को आजमाया जा चुका है, पर कोई भी खिलाड़ी यहां फिट नहीं बैठ रहा है। पांच छह और सात नंबर का भी कमोबेश यही हाल है। मध्यक्रम में एक स्तर के बल्लेबाजों की जरूरत है जो खेल को अंत तक ले जाने की क्षमता रखते हों। इसी तरह टीम में तीन ऐसे स्पिनर चाहिए, जो बल्लेबाजी में भी दमखम दिखा सकें।

फिलहाल एक जैसी क्षमता वाले पंद्रह खिलाड़ियों को तैयार करना होगा, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन चुना जा सके। यह इसलिए जरूरी है कि किसी भी प्लेयर के घायल होने की स्थिति में उसकी कमी न खले। हमें ऐेसे नए प्लेयर्स को खासतौर से प्रोत्साहन देना होगा जो विदेश में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। बहरहाल एशिया कप के बाद टीम इंडिया का बहुत ही व्यस्त कार्यक्रम है। इन मैचों में हम बहुत से खिलाड़ियों को आजमा सकते हैं। कुछ प्रयोग भी कर सकते हैं। लेकिन बीसीसीआई के सामने एक चुनौती यह भी होगी कि खिलाड़ियों को पूरी तरह से फिट रखा जाए या फिर उन्हें ज्यादा थकान ना हो। देखना है इसके लिए टीम प्रबंधन क्या करता है। इस बार एशिया कप ने साफ कर दिया कि महाद्वीप का क्रिकेट परिदृश्य बदल रहा है। बांग्लादेश और अफगानिस्तान नई ताकत के रूप में उभर रहे हैं। बांग्लादेश इस बार विश्व कप में कड़ी चुनौती पेश करेगा। पाकिस्तान की लय टूट गई है। श्रीलंका तो बुरी हालत में है। उसकी टीम पूरी तरह दिशाहीन नजर आई। हमें बदल रही चुनौतियों के अनुरूप रणनीति बनानी होगी।

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