सौर ऊर्जा की चमक

विचार

प्रतीकात्मक चित्र

देश के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों के साथ संयुक्त रूप से ‘चैंपियंस आफ द अर्थ अवॉर्ड’ देने की घोषणा की गई है। यूनाइटेड नेशंस की ओर से पर्यावरण क्षेत्र में दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा सम्मान है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन तथा पर्यावरणीय कार्रवाई की दिशा में नई पहलकदमियों को प्रोत्साहन देने के लिए मोदी और मैक्रों को यह सम्मान मिला है।

ये दोनों राजनेता दुनिया के उन छह प्रबुद्ध लोगों में हैं, जिन्हें पर्यावरण में बदलाव की कोशिशों के लिए पुरस्कार हेतु चुना गया है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) भारत की पहल है, जिसे भारतीय प्रधानमंत्री और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने संयुक्त रूप से नवंबर 2015 में पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन सीओपी-21 के इतर शुरू किया था। आईएसए एक संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो सौर ऊर्जा संपन्न देशों के साथ गठजोड़ में इसको प्रोत्साहन देने के लिए काम करता है।

भारत ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जिस तेजी से तरक्की की है, वह पूरे विश्व के लिए सुखद आश्चर्य का विषय है। बीते तीन साल में भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन अपनी स्थापित क्षमता से चार गुना बढ़ कर 10 हजार मेगावाट की सीमा पार कर गया है। इस क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए विदेशी कंपनियों की निगाहें भी भारत पर टिकी हुई हैं और वे लगातार इसमें निवेश कर रही हैं। मरकॉम कम्युनिकेशंस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत 2017 में सौर ऊर्जा के मामले में तीसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में उभरा है और इस मामले में सिर्फ चीन और अमेरिका से पीछे है। रिपोर्ट के अनुसार 2017 में भारत ने रेकॉर्ड 9600 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं लगाईं, जो 2016 में 4300 मेगावाट के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। आईएचएस मार्किट का अनुमान है कि भारत 2018 में, यानी इसी साल अमेरिका को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर आ जाएगा। उसका कहना है कि इस साल भारत 11 गीगावाट तक की परियोजनाएं लगाएगा जबकि अमेरिका 10 गीगावाट तक के ही प्रॉजेक्ट्स लगाएगा। हालांकि सौर ऊर्जा का क्षेत्र इतना चमकीला भी नहीं है।

अभी सरकार सौर ऊर्जा उत्पादन पर भारी सब्सिडी दे रही है, जिससे इसमें उछाल है। लेकिन इसकी मार पारंपरिक बिजली परियोजनाओं पर पड़ रही है, जिनका कमजोर पड़ना बाद में हमारे लिए भारी पड़ सकता है। सरकार को देखना होगा कि सौर ऊर्जा को बढ़ाने के चक्कर में ताप बिजलीघरों की हालत कहीं और न बिगड़ जाए और निजी कंपनियां इनसे पल्ला न झाड़ने लगें। इसलिए देर-सबेर हमें सोलर एनर्जी को प्रतिस्पर्धी बनाना होगा और कोयले से चलने वाले अपने बिजलीघरों पर से प्रदूषणकारी उद्यम का कलंक हटाना होगा।

Products You May Like

Articles You May Like

Lenovo S5 Pro के टीजर से कैमरा और कलर वेरियंट्स का चला पता
Airtel फ्री दे रही है Netflix और ZEE5 सब्सक्रिप्शन, जानें ऑफर के बारे में
Voter ID Card में तस्वीर बदलने का ऑनलाइन तरीका
कर्क राशि में जन्मे लोगों की होती हैं ये खूबियां
ऐसे थे पाक के 10 टैंक उड़ाने वाले खेत्रपाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *