रुपया सुधरा, महंगाई घटी, शेयर बाजार उछले

बिज़नेस

रुपये में सुधार

मुंबई
शुक्रवार को करेंसी मार्केट में रुपये ने डॉलर के मुकाबले नीचे गिरने के बाद अच्छी-खासी रिकवरी की। डॉलर के मुकाबले रुपय 34 पैसे की बढ़त के साथ 71.85 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये में रिकवरी से शेयर मार्केट ने भी रफ्तार पकड़ी। कारोबार के अंत में बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 373 अंक यानी एक फीसदी की तेजी के साथ 38,091 के स्तर पर बंद हुआ।

एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 145 अंक यानी1.3 फीसदी की उछाल के साथ 11,515 के स्तर पर बंद हुआ है। शेयर मार्केट में इस तेजी से निवेशकों ने करीब 2 लाख करोड़ रुपये की कमाई की। इस तेजी से बीएसई में लिस्टिड कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यु में करीब 2 लाख रुपये करोड़ रुपये की तेजी आई।

क्या कहते हैं जानकार
एक्सपर्ट का कहना है कि इस वक्त करेंसी आैर शेयर मार्केट उंमीदों पर काम कर रहा है। मार्केट एक्सपर्ट एस.वी. वेंकेटश का कहना है कि इस वक्त कारोबारियों को उंमीद है कि डॉलर के मुकाबले रुपये को तर्कसंगत स्तर पर रखने के सरकार के प्रयास तेज होंगे। निश्चित रूप से सरकार किसी भी तरह से रुपये के गिरावट के इकोनामी पर साइड इफेक्ट को रोकने का प्रयास करेगी। यही कारण है कि दोनों मार्केट में इस वक्त तेजी आ रही है। अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में हैं।

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद गर्ग का कहना है कि सरकार का यह कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट वास्तविक याना सामान्य नहीं है। यानी रुपये पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाया जा रहा है। सरकार इसी दबाव को कम करने का प्रयास कर रही है।

रुपये की मजबूती से शेयर मार्केट में तेज देखने को मिली। बीएसई आैर एनएसई के निफ्टी में तेजी देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोश नजर आया। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी से ज्यादा मजबूत होकर 16,350 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का मिडकैप 100 इंडेक्स 1.8 फीसदी की उछाल के साथ 19,389 के स्तर पर बंद हुआ।

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में घटकर चार माह के न्यूनतम स्तर 4.53 प्रतिशत तक गिर गयी है। खाद्य पदार्थों खासकर सब्जियों के भाव में कमी से मुद्रास्फीति में नरमी रही। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेताया कि रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नीतिगत दर में वृद्धि कर सकता है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई कमी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी के प्रभाव को कम किया।

इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति जुलाई में 4.8 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5 प्रतिशत हो गयी। यह संकेत है कि बाजार में कीमतें निर्धारित करने की क्षमता रखने वाली कंपनियों ने रुपये में गिरावट और ईंधन के साथ बढ़ी लागत का बोझ अंतिम कीमतों पर डालना शुरू कर दिया है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को उम्मीद है कि रुपया एक स्तर के बाद नहीं गिरेगा और रिजर्व बैंक महंगाई पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाएगा। वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये में और गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई की कमान में पर्याप्त तीर हैं।

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