‘रावण’ की रिहाई पर दलितों ने खेली नीली होली

देश

चंद्रशेखर रावण की रिहाई की खुशी में नीले रंग से खेली गई होली

शादाब रिजवी, सहारनपुर

सहारनपुर जेल से भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की रिहाई के बाद शुक्रवार को दलितों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रावण के छुटमलपुर के घर पर भारी हुजूम इकट्ठा हुआ और नीले रंग से होली खेली गई। लोगों ने रावण से संघर्ष करने की अपील की और साथ देने का भरोसा दिया। हालांकि, रावण ने जोश से भरपूर समर्थकों को स्वागत करने से रोका और ऊर्जा बचाकर रखने की अपील की। रावण ने कहा कि अब बहुजन समाज की सेवा में जुटने और अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए तैयार रहें।

बताते चलें कि रावण के रिहा होने की खबर सुनते ही रात में ही जोश से भरपूर समर्थक जेल पर जा डटे थे। रात में रिहाई के बाद जुलुस के तौर पर रावण को गांव ले गए। समर्थक जगह-जगह स्वागत करने लगे। शुक्रवार को दिनभर आसपास के जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड के समर्थक भी मिलने पहुंचे। ज्यादातर समर्थन नीले रंग के कपड़े पहने थे और नीला रंग लेकर होली खेल रहे थे।

पढ़ें: BJP पर उल्टी न पड़ जाए ‘रावण’ की रिहाई!

‘संगठन के लिए काम करेंगे, वक्त बर्बाद नहीं करना है’

काफी देर रिहाई का जश्न चलने के बाद रावण ने समर्थकों से कहा, ‘अब स्वागत में वक्त खराब नहीं करेंगे बल्कि समाज सेवा के लिए जुटना है। जरूरतमंदों के लिए काम करना है। मैं जेल से बाहर काम करने के लिए आया हूं। बहुजन समाज के खिलाफ काम करने वालों के लिए न सोएंगे और न दूसरों को सोने देंगे। आगे बड़ी चुनौती है, कल से संगठन की मजबूती के लिए काम करूंगा।’

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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को योगी सरकार ने किया रिहा
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आरक्षण के मुद्दे पर रावण ने कहा, ‘हम व्‍यवस्‍था को सुधारना चाहते हैं। जागरूक लोग ही विधानसभा और लोकसभा जाएं व्यवस्था खुद सुधर जाएगी। जब तक भीमराव आंबेडकर के सपने का भारत नहीं बनता, तब तक हम प्रयास करते रहेंगे।’ उन्‍होंने एससी/एसटी ऐक्‍ट को पेचीदा बनवाने पर केंद्र सरकार को घेरा। रावण की अपील के बाद समर्थक शांत हो गए और बोले, ‘तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।’

पढ़ें: रावण की रिहाई से दलितों को रिझाने की कोशिश, बीएसपी के लिए मुसीबत

बीएसपी प्रमुख मायावती को बुआ और सम्मानीय बताया

रावण ने बीएसपी से खिलाफ या पक्ष में सियासी पारी खेलने के सवाल पर चौंकाने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘मायावती मेरी बुआ समान है। उनसे खून का रिश्ता है, मैं उनका सम्मान करता हूं। उन्होंने समाज के लिए काफी काम किए हैं।’


रावण की मां बोलीं, ‘मिशन से जुड़ा हर युवा मेरा चंद्रशेखर’


चंद्रशेखर की मां का कहना है, ‘बेटे की रिहाई की बात सुनकर मुझे एक बार तो यकीन नहीं हुआ। जब सीएम को टीवी पर सुना कि चंद्रशेखर की रिहाई कर रहे हैं, तब यकीन आया। आज मैं बहुत खुश हं, बेटे के बाहर आने पर बहुत अच्छा लग रहा है। बेटा इतने दिन जेल में रहा, मैं तिल-तिल मरी। हर सांस पर मौत देखी, परेशानी उठाई। मेरे परिवार के हर सदस्य ने रिहाई के लिए बहुत कोशिश की। उस मेहनत का फल ही है कि बेटा हमारे बीच है। मेरे लिए मिशन से जुड़े सभी बच्चे मेरे चंद्रशेखर हैं। बेटा दबों की आवाज उठा रहा है, लोग उसके साथ हैं।’ चंद्रशेखर की मां को उम्मीद है कि अगर ऐसे ही लोगों का साथ बेटे को मिला फिर एक दिन वह कुछ जरूर बनेगा। साथ ही उनका आरोप है कि उनका बेटे चंद्रशेखर ने लड़ाई शुरू नहीं की थी बल्कि उसको लड़वाया गया, राजपूत समाज ने लड़ाने का काम किया।

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