जुए में हारकर जब पांडव वन जाने लगे तो द्रौपदी ने ऐसा क्या कहा, युधिष्ठिर ने मूंद ली आंखें

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जुए में अपना सारा राजपाट हार जाने के बाद जब पांडव द्रौपदी के साथ वनवास को जाने लगे तो किन-किन कष्‍टों से गुजरना पड़ा। राजमहल के ठाठबाट छोड़कर उन्‍होंने कैसे वनवास की अपनी पहली रात गुजारी, आइए जानते हैं इस बारे में…

1/8युधिष्ठिर ने मूंद रखी थीं अपनी आंखें

जिस वक्‍त सभी पांडव द्रौपदी के साथ वन की ओर जा रहे थे उस वक्‍त युधिष्ठिर ने क्रोध के कारण अपनी आंखें मूंद रखी थीं। राजा धृतराष्ट्र ने पांडवों के बारे में विदुर से पूछा तो उन्‍होंने बताया कि युधिष्ठिर इतने क्रोध में हैं कि उनके सामने यदि और इस वक्‍त आ जाएं तो भस्‍म हो जाएंगे।

2/8भीम ने फैला रखी थीं अपनी भुजाएं

विदुर ने धृतराष्‍ट्र को बताया कि भीम ने अपनी शक्तिशाली भुजाओं को फैला रखा है। जो अस बात की ओर इशारा हैं कि समय आने पर मैं अपने भुजाओं के बल से कौरवों का नाश कर सकता हूं।

3/8अर्जुन के तेवर थे ऐसे

वहीं धनुवीर अर्जुन रास्‍ते पर ऐसे धूल उड़ाते हुए चल रहे थे मानों वह बताना चाह रहे हों कि युद्ध होने पर ऐसे ही धूल के समान बाणों की वर्षा करेंगे।

4/8नकुल-सहदेव थे ऐसे

वहीं नकुल और सहदेव को तो कोई पहचान ही नहीं सकता था। क्रोध से आगबबूला इन दोनपों अनुजों ने अपने पूरे शरीर पर धूल मल ली थी। मानों कहना चाह रहे हों कि युद्धभूमि में कौरवों को ऐसे ही धूल चखाएंगे।

5/8बदहाल थीं द्रौपदी

फटे-पुराने वस्‍त्र पहने द्रौपदी ने अपने केश खोल रखे थे और रोती हुई कौरवों के नाश की बात करते हुए चले जा रही थी। उन्होंने चलते समय कहा है कि जिनके कारण मेरी यह दुर्दशा हुई है, उनकी स्त्रियां भी आज से चौदहवें वर्ष के बाद अपने स्वजनों की मृत्यु से दु:खी होकर इसी प्रकार हस्तिनापुर में प्रवेश करेंगी। ठीक ऐसा ही हुआ भी।

6/8इस पेड़ के नीचे पांडवों ने गुजारी पहली रात

राजसी ऐशोआराम छोड़कर वन में जीवन बिताने निकले पांडवों के लिए महल के मखमल के बिस्‍तरों को छोड़कर वन में पहली रात बिताना आसान नहीं था। पत्‍नी समेत इन पांचों ने प्रमाण नाम के एक बरगद के पेड़ के नीचे रात बिताई।

7/8ब्राह्मण भी हो लिए इनके साथ

रात बिताने के बाद जब ये सभी उठकर फिर से वन की ओर चल पड़े तो इन्‍होंने देखा कि कुछ ब्राह्मण भी इनके साथ हो लिए। वन में अपने खाने का ठिकाना नहीं था और ब्राह्मणों को अपने साथ आता देख युधिष्ठिर को उनको खिलाने-पिलाने की चिंता सताने लगी।

8/8भगवान सूर्य ने की मदद

युधिष्ठिर ने निराश होकर भगवान सूर्य से मदद मांगी। तब सूर्य देवता ने उन्‍हें तांबे का अक्षय पात्र देकर कहा कि तुम्‍हारी रसोई में जो कुछ बनेगा वो तब तक खाली नहीं होगा, जब तक द्रौपदी उसे परोसती रहेगी।

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