ऋषि पंचमी आज, इस व्रत की कथा का संबंध है मासिक धर्म से, जानें क्या कहता है पुराण

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भाद्रपद की शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी के रूप में मनाया जातै है। इस दिन ऋषियों की पूजा की जाती है। लेकिन भविष्य पुराण में इस व्रत की जो कथा मिलती वह आज के जमाने में पूरी तरह से अवैज्ञानिक है क्योंकि इस व्रत की कथा को मासिक धर्म को जोड़कर बताया गया है। कथा में मासिक धर्म को इस रूप में बताया गया है जैसे कि यह अपराध हो। आइए जानें पुराण में इस व्रत की क्या कथा है।

1/6इस तरह मिलता है उल्लेख

भविष्यपुराण में एक कथा का उल्लेख मिलता है, जिसमें बताया गया है कि विदर्भ देश में एक उत्तंक नाम का ब्राह्मण था। विदर्भ वही राज्य है जहां के राजा भीष्मक थे और उनकी पुत्री देवी रुक्मणी थीं। यहां एक ब्राह्मण का एक पुत्र और उनी पुत्री रहती थी। उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह एक सुयोग्य वर के साथ कर दिया लेकिन कुछ दिनों बाद ही पति की मृत्यु हो गई। उत्तंक की पुत्री ने अकेले जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया।

2/6मां ने देखा पुत्री का कष्ट

एक दिन ब्राह्मण की कन्या अकेली सो रही थी तभी उसकी मां ने देखा कि पुत्री के शरीर कीड़ों से भर गया। वह ब्राह्मण के पास गई और सारी बात बता दी। उत्तंक ने ध्यान कर अपनी पुत्री के पूर्वजन्म के बारे में देखा कि वह पहले भी ब्राह्मण की पुत्री थी।

3/6इस वजह से मिले कष्ट

ऋषि ने देखा कि महावारी में ब्राह्मण की पुत्री ने पूजा के बर्तन छू दिए थे और ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया था। इसलिए इस जन्म में इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं।

4/6ब्राह्मण ने बताया रास्ता

उत्तंक ने अपनी पत्नी को बताया कि अगर हमारी पुत्री ऋषि पंचमी का व्रत करती, तो उसके सभी दुख दूर हो जाते। उसको सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त होता।

5/6सभी कष्टों से मिली मुक्ति

पिता ने अपनी बेटी को इन कष्टों से मुक्ति पाने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत करने के लिए कहा। पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत किया। ऋषि पंचमी के व्रत से पुत्री को अगले जन्म में अटल सौभाग्य का आशीर्वाद मिला। इस बार यह व्रत 14 सिंतबर, शुक्रवार को है।

6/6पुण्य फलदायी है यह व्रत

माहवारी के दौरान महिलाओं की अनजाने में जो गलतियां हो जाती हैं, उन दोषों से रक्षा करने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है और यह व्रत पुण्य फलदायी है। बताया जाता है जो भी सच्चे मन से ऋषि पंचमी की पूजा करने और उपवास रखने से सभी दोष-बाधाएं दूर हो जाती हैं। साथ ही इस दिन गंगा स्नान का भी महत्व है।

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