सिविल इंजिनियर बनना क्यों नहीं अच्छा, जानें

कैरियर, जॉब junction

सांकेतिक तस्वीर

राधेश्याम जाधव, नई दिल्ली
भर्ती के मामले में देश में सिविल इंजिनियरों की बुरी हालत है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2012-13 और 2015-16 के बीच में इंजिनियरिंग की छह स्ट्रीमों में सिर्फ 38 फीसदी प्लेसमेंट हुआ जो बहुत घटिया रेकॉर्ड है। जब निर्माण सेक्टर तेजी से उभरता हुआ सेक्टर है, ऐसे में सिविल इंजिनियरों की मांग में काफी कमी होना चिंता का विषय है।

आंकड़ों से पता चलता है कि इस अवधि में केमिकल इंजिनियरिंग में सर्वाधिक प्लेसमेंट मिले। इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्यूनिकेशन में भी अपेक्षाकृत बहुत ही कम 48 फीसदी प्लेसमेंट रहा जो चौंकाने वाली बात है। सिर्फ तीन स्ट्रीमों केमिकल इंजिनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और मैकनिकल इंजिनियरिंग में 50 फीसदी से ज्यादा ग्रैजुएट्स का प्लेसमेंट हुआ।

पास परसेंटेज में भी फेल सिविल इंजिनियर्स
इसमें विभिन्न स्ट्रीमों में कोर्स करने वाले छात्रों का डेटा भी जारी किया गया है। देखने में आया है कि सिविल इंजिनियरिंग में पास परसेंटेज बहुत ही कम 39 फीसदी है जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन में सफलता हासिल करने वाले छात्रों का परसेंटेज 74 फीसदी रहा।

लोकप्रियता
लोकप्रियता की बात की जाए तो मकैनिकल इंजिनियरिंग सर्वाधिक लोकप्रिय स्ट्रीम रहा जिसमें एआईसीटीई द्वारा मंजूरी कोर्सों के लिए 20 लाख से ज्यादा छात्रों ने दाखिला लिया। उसके बाद कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजिनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन, इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग और केमिकल इंजिनियरिंग का नंबर रहा। मकैनिकल इंजिनियरिंग में इन चार सालों में पास परसेंटेज 47 फीसदी रहा जबकि प्लेसमेंट सिर्फ 50 फीसदी। केमिकल इंजिनियरिंग सबसे कम पसंद की जाने वाली ब्रांच रही जिसमें चार सालों में सिर्फ 86,000 छात्रों ने दाखिला लिया।

रोचक बात है कि 2013-14 और 2017-18 में एआईसीटीई द्वारा स्वीकृत सिर्फ 55 फीसदी सीटें भर पाईं और इस अवधि में 214 संस्थान बंद हुए। 77 लाख से ज्यादा छात्रों ने इस अवधि में इंजिनियरिंग की विभिन्न स्ट्रीमों में दाखिला लिया जिनमें से तीन चौथाई से ज्यादा लड़के थे। इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल के सालों में इंजिनियरिंग की सीटों में उम्मीद से ज्यादा इजाफा हुआ है जिस कारण सीटें खाली रह जाती हैं। उनका कहना है कि एक कारण यह भी है कि इंजिनियरिंग कॉलेजों से ग्रैजुएशन करने वालों के पास जरूरी कौशल नहीं होते जिस कारण इंडस्ट्री उनको हायर नहीं करती है। इससे इंजिनियरिंग के प्रति छात्रों की दिलचस्पी में कमी आई है।

सांकेतिक तस्वीर

Products You May Like

Articles You May Like

UGC ने 29 सितंबर को ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाने का निर्देश जारी किया, विपक्षी दलों ने विरोध जताया
Indian Idol 10: सलमान अली के गाने से फिदा हुए विशाल भारद्वाज, अब देने जा रहे ये तोहफा
सऊदी सरकार के जॉब पर नए फरमान से होगी विदेशियों की छुट्टी
UPSC 2018: Mains Exam 28 सितंबर से हो रहा है शुरू, जानिए परीक्षा का पूरा टाइम टेबल
ई-कॉमर्स पॉलिसी में देरी पर बिफरे ट्रेडर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *