केरल में तबाही का मंजर: भारी बारिश से अब तक 26 की मौत, मंत्री बोले- 50 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा बारिश

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नई दिल्ली: केरल में भारी बारिश के बाद बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है. जगह-जगह लैंडस्लाइड की वजह से 26 लोगों की मौत हुई है और कई लोग लापता हैं. कन्नूर, इडुक्की, कोझिकोड, वायनाड, मल्लपुरम सबसे प्रभावित इलाक़े हैं. एर्नाकुलम, अलापुझा और पलक्कड़ ज़िले भी प्रभावित हैं. कई इलाक़ों में रेड अलर्ट जारी किया गया है. बाढ़ प्रभावित इलाक़ों से लोगों को निकाल कर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है. NDRF की 6 टीमों को राहत और बचाव के अभियान में लगाया गया है. कुछ और टीमें बुलाई गई हैं. इसके अलावा सेना भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है. बाढ़ की वजह से हालत इतने खराब हैं कि जगह सड़कें बह गई हैं. रेलवे ट्रैक को भी नुक़सान पहुंचा है.

केरल में भारी बारिश और भूस्खलन से 24 लोगों की मौत, कई बांध खोले गए

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इतना ही नहीं, केरल में भारी बारिश के चलते स्कूलस कॉलेजों को बंद रखने के आदेश दिये गये हैं. एनडीआरएफ ने हालाच को गंभीर बताया है. यही वजह है कि प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य जारी है. नौसेना की ओर से भी राहत और बचाव के काम में मदद पहुंचाई जा रही है. साउदर्न नेवल कमांड ने वायनाड ज़िले में गोताखोरों की 4 टीमें भेजी हैं. इसके अलावा नेवी का एक हेलीकॉप्टर भी प्रभावित इलाक़े से लोगों को निकालने में जुटा है.

इस बीच पीएम मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को फ़ोन कर हालात का जायज़ा लिया. पीएम मोदी ने मुश्किल की इस घड़ी में हर संभव मदद का आश्वासन दिया. इधर मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर हालात का जायज़ा लिया. वहीं, केरल से आने वाले केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने कहा कि पांच दशकों में केरल में यह सबसे भयंकर बारिश है. पिछले पचास सालों में यह सबसे बड़ी बारिश है. 

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भारी बारिश के कारण कई नदियां उफान पर हैं जिस कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में कम से कम 24 बांधों को खोल दिया गया है. एशिया के सबसे बड़े अर्ध चंद्राकार बांध इडुक्की जलाशय से पानी छोड़े जाने से पहले रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. सरकार ने बताया कि राज्य में पिछले दो दिनों में दस हजार से अधिक लोगों को 157 राहत शिविरों में भेजा गया है. सरकार ने लोगों से कहा है कि राज्य के ऊपरी इलाकों और बांध वाले इलाकों में नहीं जाएं.

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इसेस पहले भारी बारिश के कारण कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो घंटे के लिए विमानों की लैंडिंग रोक दी गई. नजदीक स्थित पेरियार नदी में जल स्तर बढ़ने के कारण हवाई अड्डा क्षेत्र में पानी भरने की आशंका थी. हवाई अड्डे के एक प्रवक्ता ने कहा कि अपराह्न तीन बजकर पांच मिनट पर लैंडिंग की शुरुआत हो गई. समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि बाढ़ की स्थिति ‘काफी विकट’ है और राज्य के इतिहास में पहली बार 24 बांधों को एक साथ तब खोला गया है जब उनमें जल स्तर अधिकतम सीमा तक पहुंच गया है. इडुक्की जलाशय के चेरूथोनी बांध को 26 वर्षों के बाद खोला गया है. 

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