ड्राइवरों और गार्डों को लोहे के भारी-भरकम बक्से की जगह ट्रॉली बैग देने लगा रेलवे

बिज़नेस

लोहे के बक्से की जगह ट्रॉली बैग दे रहा है रेलवे।

नई दिल्ली
भारतीय रेल न केवल यात्रियों की बल्कि अपने स्टाफ की भी सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसी सिलसिले में रेलवे ने लोको पायलटों और गार्डों को लोहे के भारी-भरकम बक्सों की जगह अप हल्के ट्रॉली बैग देने लगा है। रेलवे ड्राइवरों और गार्डों को मिलनेवाले ये बक्से लाइन बॉक्स कहलाते हैं जिनमें एक-एक मेडिकल किट, दो-दो लाल और एक-एक हरी झंडियां, ट्रेन संचालन के मैन्युअल बुक्स, टॉर्च/हैंड सिग्नल लैंप, टिन के डब्बे में डेटॉनेटर्स, सीटी और बक्से की रखवाली के लिए उपयुक्त ताले के साथ एक चेन एवं कुछ अन्य सामान होते हैं।

चूंकि, चक्के लगे ब्रीफकेस हल्के और आसानी से लाने-ले जाने लायक होंगे, इसलिए रेलवे ने इसी हिसाब से नई गार्ड-किट भी तैयार की है जो पहले की तुलना में हल्की और छोटी है। साथ ही, सभी रूल बुक्स और वर्किंग टाइम टेबल्स (WTTs) की जगह प्रो-लोडेड टैबलट लगा दिए गए हैं।

फर्स्ड-ऐड (प्राथमिक उपचार) किट पहले मेल/एक्सप्रेस/पैसेंजर ट्रेनों के गार्डों का व्यक्तिगत औजार हुआ करती थी। उसे वह ब्रेक-वैन इक्विपमेंट बना दिया गया है। रेलवे बेसिक फर्स्ट-ऐड किट की जगह हर ट्रेन और स्टेशन पर 88 जीवनरक्षक औजार, दवाइयां और इंजेक्शन मुहैया करा चुका है।

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