गुरु हरकिशनजी: इसलिए 5 साल की उम्र में ही बन गए थे सिक्खों के 8 वें गुरु

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गुरु हरकिशनजी: इसलिए 5 साल की उम्र में ही बन गए थे सिक्खों के 8 वें गुरु

जिस डिठे सब दुख जाए… सिख धर्म की अरदास की यह पंक्तियां सिखों के आठवें गुरु हरकिशन जी को समर्पित हैं। रविवार को उनके प्रकाश वर्ष के मौके पर दिल्‍ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में सरोवर के किनारे कीर्तन दरबार सजाया गया। आइए जानते हैं हरकिशन जी के जीवन के बारे में खास बातें…

जन्‍म स्‍थान पर बना गुरुद्वारा
नानकशाही कैलेंडर के अनुसार गुरु हरकिशन जी का जन्म 23 जुलाई, 1656 को सिखों के सातवें नानक ‘गुरु हरिराय जी’ और माता कृष्णाजी (सुलखना जी) के यहां हुआ। प्राचीन परंपरा के अनुसार इनका जन्मदिवस 6 अगस्त है। गुरु हरकिशनजी का जन्म भी उसी स्थान पर हुआ, जहां इनके पिता सातवें गुरु हरिरायजी का जन्म हुआ था। यह स्थान आज के समय में पंजाब के कीरतपुर साहिब शहर में आता है। इस स्थान पर गुरुजी की याद में आज गुरुद्वारा श्री शीश महल बनाया गया है।

गुरु नानक देव पर यह खास विडियो देखिए

पिता ने बैठाया गद्दी पर
हरिकिशन जी के अलावा हरिरायजी के बड़े पुत्र थे रामराय। मगर उनके द्वारा सिख धर्म की मर्यादाओं का उल्‍लंघन करने की वजह से हरिरायजी ने हरिकिशनजी को अपना उत्तराधिकारी नियुक्‍त किया। उन्‍होंने सन 1961 में ही अपनी मृत्‍यु से पहले उन्‍हें गद्दी पर बैठा दिया और सिखों का आठवां गुरु घोषित कर दिया। छोटी सी उम्र में यह जिम्‍मेदारी मिलने के बावजूद हरिकिशनजी ने बड़ी ही सूझ-बूझ से इसका निर्वहन किया। 1664 ई. में अपना 8वां जन्मदिन मनाने से पहले ही चेचक रोग के कारण परमधाम चले गए।

बड़े भाई रामराय मुगलों से जा मिले
अपने छोटे भाई हरिकिशन का गद्दी पर बैठना रामराय को नागवार गुजरा और वह मुगल बादशाह औरंगजेब से जा मिले।

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