स्काईस्क्रैपर

फ़िल्म रिव्यू

डरना बुरी बात नहीं होती। कभी-कभी बहादुर बनने के लिए डरना जरूरी होता है। फिल्म ‘स्काईस्क्रैपर‘ के एक सीन में ड्वेन जॉनसन अपने बेटे को यह शिक्षा देता है, तो खुद भी मुश्किल परिस्थितियों में इस पर अमल करते हैं। यह फिल्म स्वायर (ड्वेन जॉनसन) की कहानी है, जो कि एफबीआई एजेंट था। 10 साल पहले एक ऑपरेशन में लोगों की जान बचाने के दौरान वह अपनी टांग गवां देता है। अब वह ऊंची इमारतों की सिक्यॉरिटी को चेक करने वाली एक कंपनी चलाता है। उसकी पत्नी और दो जुड़वा बच्चे उसके साथ ही रहते हैं।

स्वायर का एक दोस्त उसकी मुलाकात हांगकांग में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत पर्ल के मालिक से कराता है, जो कि उससे अपनी बिल्डिंग की सेफ्टी चेक कराना चाहता है। वह स्वायर को अपनी बिल्डिंग के तमाम सिक्यॉरिटी एक्सेस से जुड़ा टैबलेट देता है। दरअसल, पर्ल का मालिक बिल्डिंग के रेसिडेंशल फ्लोर भी खोलना चाहता है। इस दौरान स्वायर की फैमिली भी एक फ्लोर पर ही रुकती है। अपनी फैमिली को जू भेज कर स्वायर अपने दोस्त के साथ बिल्डिंग की सिक्यॉरिटी चेक करने कंट्रोल रूम जाता है। इसी बीच उस पर हमला होता है और हमलावर उसका बैग छीन कर भाग जाता है।

दरअसल वह हमलावर वह टैबलेट छीनना चाहता था। लेकिन वह स्वायर के जेब में ही था। तब स्वायर को पता लगता है कि वह बड़ी साजिश का शिकार हो गया है और उसको बिल्डिंग के मालिक से मिलवाने वाले उसके दोस्त ने उसका इस्तेमाल उसका टैबलेट लेने के लिए किया है। दरअसल वह एक गैंग से जुड़ा है, जो पर्ल के मालिक से बदला लेना चाहते हैं। इसी बीच गैंग के लोग स्वायर पर हमला करके उससे टैबलेट छीन लेते हैं। वहीं गैंग के बाकी लोग बिल्डिंग का सिक्यॉरिटी सिस्टम फेल करके वहां आग लगा देते हैं। स्वायर को पता चलता है कि उसकी पत्नी और बच्चे भी पर्ल में लौट चुके हैं, तो वह उन्हें बचाने के लिए अपनी जान पर खेल कर आग लगी हुई बिल्डिंग में घुस जाता है। स्वायर अपनी फैमिली को बचा पता है या नहीं? यह जानने के लिए आपको सिनेमा घर जाना होगा।

यूं तो यह फिल्म महज एक बिल्डिंग की कहानी है, लेकिन डायरेक्टर ने अनोखी बिल्डिंग दिखाई है। फिल्म कहीं भी आपको बोर नहीं होने देती। दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग होने के साथ वह सिक्यॉरिटी के मामले में भी आगे है। स्वायर ने अपनी फैमिली को बचाने के लिए कई हैरतअंगेज सीन किए हैं। ड्वेन जॉनसन ने फिल्म में बेहतरीन ऐक्टिंग की है। वहीं उनके साथी कलाकारों ने भी अपने रोल्स को ठीकठाक निभाया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ कसा हुआ है, तो सेकंड हाफ और भी रोमांचक है। फिल्म के कुछ सीन सिहरन पैदा करते हैं। अगर वीकेंड पर कुछ रोमांचक देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म देख सकते हैं।

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