सिर्फ महिलाएं करा सकती हैं इस मंदिर में पूजा, देखें

राशि


एक तरफ जहां देश की कई प्रसिद्ध मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है वहीं, दूसरी तरफ देश में एक ऐसा मंदिर भी है जहां की पुजारी सिर्फ महिलाएं होती हैं। इस मंदिर का संबंध त्रेतायुग से है। आइए जानते हैं कहां स्थित है यह अनोखा मंदिर और क्या है इसका धार्मिक महत्व…

1/4इन्हें समर्पित है यह मंदिर

बिहार राज्य के दरभंगा जिले के कमतौल में स्थित है यह अनोखा मंदिर। इस मंदिर में विराजित हैं देवी अहिल्या। त्रेतायुग में जन्मी वही देवी अहिल्या जिनका उद्धार भगवान राम के चरणों के स्पर्श से हुआ था। रामायण में इस घटना का विस्तार से वर्णन मिलता है कि जनकपुर जाते समय रास्ते में भगवान राम का पैर जैसे ही एक शिला पर पड़ता है, वह शिला जीवित स्त्री में बदल जाती है। यह स्त्री देवी अहिल्या थीं।

2/4यह है इस मंदिर की विशेषता

दूर-दूर तक यह मंदिर अपनी इसी विशेषता के लिए जाना जाता है कि इस मंदिर में पुजारी की भूमिका महिलाएं निभाती हैं। इस मंदिर को शाप मुक्ति स्थल भी कहा जाता है। सनातन धर्म में आस्था रखनेवाले और श्रीराम के भक्त दूर-दूर से इस मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।

3/4पति के शाप से पत्थर बनीं थी अहिल्या

देवी अहिल्या गौतम ऋषि की पत्नी थीं और बेहद आकर्षक व्यक्तित्ववाली खूबसूरत महिला थीं। एक बार स्वर्गलोक के देवता इंद्र देवी अहिल्या पर मोहित हो गए। इंद्र जानते थे कि देवी अहिल्या उनके वास्तविक रूप में प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगी क्योंकि वह पतिव्रता स्त्री हैं। इसलिए जब गौतम ऋषि अपने आश्रम में नहीं होते, इंद्र गौतम ऋषि का वेश धारण करके आश्रम में पहुंचते हैं और देवी अहिल्या के साथ वक्त बिताते हैं।

4/4आ जाते हैं गौतम ऋषि

जिस समय इंद्र गौतम ऋषि का वेश धारण किए हुए दी अहिल्या के साथ प्रेम प्रसंग में लिप्त होते हैं, उसी समय गौतम ऋषि आ जाते हैं। वह अपना वेश धारण किए हुए इंद्रदेव को पहचान लेते हैं। ऐसे में उन्हें बहुत क्रोध आता है और वह अपनी पत्नी से इस कारण रुष्ट हो जाते हैं कि वह अपने पति को अब तक पहचान नहीं पाईं। क्रोधित गौतम ऋषि देवी अहिल्या को पत्थर की शिला बनने का शाप दे देते हैं। शाप मिलते ही अहिल्या पत्थर की शिला बन जाती हैं, बाद में श्रीराम के चरणों के स्पर्श से अपने रूप में आती हैं।

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