विद्युत अधिनियम में संशोधन की केंद्र की योजना राज्यों के अधिकार का उल्लंघन: महाराष्ट्र के मंत्री

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मुंबई, तीन जून (भाषा) महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने बुधवार को केंद्र से प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि विधेयक राज्यों के संवैधानिक अधिकार और संघीय ढांचे की अवहेलना करता है। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि केंद्र को पारदर्शिता और कार्यकुशलता के लिये शक्ति के विकेंद्रीकरण पर ध्यान देना चाहिए।बिजली कानून 2003 में प्रस्तावित संशोधन को लेकर चिंता जताते हुए राउत ने आरोप लगाया कि केंद्र बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में राज्यों के अधिकार और जिम्मेदारी को दरकिनार कर उस पर प्रभुत्व रखना चाहता है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय बिजली ममंत्रालय ने अप्रैल में बिजली संशोधन विधेयक का मसौदा पेश किया। इसमें अन्य बातों के अलावा बिजली अनुबंध क्रियान्वयन प्राधिकरण (ईसीईए) के गठन का प्रावधान है। प्राधिकरण के पास वितरण कंपनियों और उत्पादक कंपनियों के बीच बिजली खरीद समझौते को लेकर विवाद के निपटान के मामले में दिवानी अदालत के अधिकार होंगे। इसमें कहा गया है कि उत्पादक और वितरण कंपनियो के बीच बिजली की खरीद या बिक्री से संबद्ध अनुबंध के मामले में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में ईसीईए के पास उसके निपटान का अधिकार होगा और वह इसके लिये एकमात्र प्राधिकार होगा। राउत ने एक बयान में कहा, ‘‘संविधान की सातवीं अनुसूची केंद्र एवं राज्य दोनों को बिजली के संबंध में कानून बनाने का अधिकार देती है क्योंकि यह समवर्ती सूची में है।’’ उन्होंने कहा कि लेकिन प्रस्तावित संशोधन से यह स्पष्ट है कि बिजली के मामले में संघीय ढांचे में हस्तक्षेप किया जा रहा है।

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