मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण ने फिलिप्स इंडिया को 4.53 लाख रुपये की मुनाफाखोरी का दोषी पाया

बिज़नेस
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नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण ने फिलिप्स इंडिया को 4.53 लाख रुपये के जीएसटी दर कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं पहुंचाने का दोषी पाया है। राष्ट्रीय मुनाफाखोरी- रोधी प्राधिकरण (एनएए) ने मुनाफाखोरी- रोधी महानिदेशालय (डीजीएपी) को इस बहुराष्ट्रीय कंपनी के खिलाफ प्राप्त शिकायत की जांच करने को कहा था। देश में एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद कंपनी के खिलाफ उसके ‘‘फूड प्रोसेसर्स’ का दाम नहीं घटाने की शिकायत थी। डीजीएपी ने पाया कि जीएसटी लागू होने के बाद फूड प्रोसेसर्स पर कर की दर को पहले के 29.80 प्रतिशत से घटाकर 28 प्रतिशत कर दिया गया। डीजीएपी ने पाया कि फूड प्रोसेसर्स का विदेश से आयात किया जाता था और इस पर फिलिप्स एमआरपी पर मूल्य वर्धित कर (12.50 से लेकर 15.95 प्रतिशत) के दायरे के अलावा 12.50 प्रतिशत की दर से प्रतिपूर्ति शुल्क का भुगतान कर रही थी। इस लिहाज से जीएसटी से पहले के समय में कंपनी को औसतन 29.80 प्रतिशत की दर से कर देना पड़ रहा था।

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