अ ब्यूटिफल डे इन द नेबरहुड

फ़िल्म रिव्यू

माफी मांगनेवाले से माफ कर देने वाला हमेशा बड़ा होता है, हम अक्सर ये बात सुनते हैं, फिर भी न जाने कितने लोगों की कितनी बातों को लेकर दिल में नाराजगी पाले रहे रहते हैं। इसके चलते खुद तो दुखी रहते ही हैं, दूसरे को भी सजा देने के लिए दुखी करना चाहते हैं। डायरेक्टर मेरियल हेलर निर्देशित हॉलिवुड फिल्म ‘अ ब्यूटीफुल डे इन द नेबरहुड’ एक ऐसे ही शख्स लॉयड वोगेल (मैथ्यू रीस) की ही कहानी है।

कहानी: एस्क्वॉयर मैगजीन का इंवेस्टिगेविट जर्नलिस्ट लॉयड ने अपने पिता जैरी (क्रिस कूपर) से नफरत के हद तक नाराज है। लॉयड किसी भी तरह अपने पिता को माफ करने को तैयार नहीं है, भले ही वह दो दिनों तक उसके घर के बाहर ही क्यों न खड़ा रहा हो। लेकिन यह नफरत और गुस्सा कहीं न कहीं उसके खुद के व्यक्तित्व को नकारात्मक बना रहा होता है। इसी दौरान, लॉयड की एडिटर उसे मैगजीन की हीरो सीरीज के लिए सबके चहेते चिल्ड्रन शो प्रेजेंटर फ्रेड रॉजर्स (टॉम हैंक्स) का इंटरव्यू करने का जिम्मा सौंपती है, क्योंकि फ्रेड वह इकलौता इंसान है, जो लॉयड को इंटरव्यू देने को तैयार हुआ। लॉयड जब रॉजर्स के शो के सेट पर पहुंचता है, तो देखता है कि वह शूटिंग रोककर एक बीमार बच्चे को खुश करने की कोशिश में लगा हुआ है। लॉयड सोचता है कि वह रॉजर्स की अच्छाई के नकाब को उतारकर उसका असली चेहरा दुनिया को सामने लाएगा, लेकिन फ्रेड का व्यक्तित्व और बातें लॉयड पर ऐसा असर डालती हैं कि उसकी सोच और जिंदगी के प्रति नजरिया बदल जाता है।

रिव्यू: फिल्म दर्शकों पर भी कुछ ऐसा ही असर डालती है कि आप खुद जिंदगी को पॉजिटिव नजरिए से देखने, दूसरों को प्रति ज्यादा दयालु बनने और एक बेहतर इंसान बनने का फैसला करते हुए थिअटर से निकलते हैं। बता दें कि यह फिल्म अमेरिका के चर्चित चिल्ड्रन टीवी शो मिस्टर रॉजर्स नेबरहुड के प्रेजेंटर फ्रेड रॉजर्स पर लिखे एस्क्वॉयर मैगजीन के जर्नलिस्ट टॉम जुनॉड के लेख पर आधारित ‘कैन यू से… हीरो?’ पर आधारित है। फिल्म को भी मिस्टर रॉजर्स के शो के एक एपिसोड के रूप में दिखाया गया है, जिसमें हम उनकी कठपुतलियों और बाल खिलौनों आदि से भी मिलते हैं। फिल्म शुरू में थोड़ी स्लो लगती है, लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, जिंदगी की तमाम मुश्किलों का हल सुझाती जाती है। यह फिल्म 1 घंटे 50 मिनट के मेडिटेशन सरीखी है, जो जिंदगी में धैर्य, माफी, दूसरों की खुशी के लिए जीने और अच्छाई के महत्व को समझाती है।

ऐक्टिंग की बात करें, तो मैथ्यू रीस लॉयड के किरदार में अंदर से टूटे हुए इंसान के कॉम्प्लैक्स को दर्शाने में कामयाब रहे हैं। वहीं, रॉजर्स के रोल में टॉम हैंक्स अपने जादुई व्यक्तित्व से बांध लेते हैं। उनकी मुस्कान, ठहराव के साथ डायलॉग बोलना, यहां तक कि खामोशी से दूसरे की बात सुनना, सब लाजवाब है। उन्हें इस परफॉर्मेंस के लिए ऑस्कर में नॉमिनेशन भी मिला है, जिसके वह वाकई हकदार हैं। फिल्म का म्यूजिक और वुड यू बी माय नेबर और आई लाइक यू जैसे गाने भी सुनने में अच्छे लगते हैं। कुल मिलाकर, मिस्टर रॉजर्स के इस ‘नेबरहुड’ में एक ‘ब्यूटीफुल डे’ बिताने के बाद जिंदगी के प्रति आपका नजरिया निश्चित तौर पर बदल जाएगा।

क्यों देखें: जमाने के जख्मों पर मरहम जैसी है यह फिल्म। जिंदगी के प्रति आशावादी नजरिए के लिए देखें।

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