नन्ही दुनिया

अगर आप अपने विद्यालय में रिपब्लिक डे के अवसर पर स्पीच से शुरुआत कर रहे हो और आपको बोलने का अवसर मिला हो, तो एक सुनियोजित स्पीच कैसी हो? आइए, जानते हैं कि आप स्पीच में क्या बातें बोल सकते हैं। मंच पर पहुंचकर आप सबसे पहले तो सभा में उपस्थित सभी लोगों का अभिवादन
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हम सभी नए साल के रिसोल्यूशन बनाने का तो सोचते हैं लेकिन क्या आपने कभी इंडिपेंडेंस डे और रिपब्लिक डे पर देश के लिए कुछ करने का सोचा है? आपको लगता होगा आप अकेले क्या कर सकते हैं, लेकिन सच तो यह है कि आपमें से हर एक अगर कुछ बेसिक बातों को आदत में
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* सांप्रदायिक सद्भाव और दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान है ‘जन गण मन’ – ज्योत्सना भोंडवे राष्ट्रगीत हो या राष्ट्रध्वज देशवासियों के आन-बान और शान के साथ प्रेरणा स्रोत होता है। जो राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का प्रतीक है। राष्ट्र के सम्मान का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ तमाम हिन्दुस्तानियों की शान और जोश का संचार करने वाला ऐसा
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रिपब्लिक डे जैसे खास मौकों पर अधिकतर जगहों पर आयोजन होते है। ऐसे में मंच पर जाकर स्पीच देने की जरूरत भी कई लोगों को पड़ती है। अगर आप भी गणतंत्र दिवस के दिन कही पर स्पीच देने वाले हैं, तो आइए हम आपकी थोड़ी मदद करदें और आपको ये बताएं कि आप अपनी स्पीच
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प्रस्तावना : प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है, जो उस देश के स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जो तीन रंगों – केसरिया, सफेद और हरे रंग से बना है और इसके केंद्र में नीले रंग से बना अशोक चक्र है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की अभिकल्पना
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जन गण मन तो आप जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं पूरा राष्ट्रगान? जन गण मन के अंतिम पद पढ़ें हैं आपने… जानिए राष्ट्रगान के वे पद जो गाए नहीं गए… [embedded content]अहरह तव आह्वान प्रचारित, शुनि तव उदार बाणी। हिन्दु बौद्ध सिख जैन पारसिक, मुसलमान ख्रिस्तानी। पूरब पश्चिम आसे, तव सिंहासन पाशे; प्रेमहार
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आजादी के महानायक सुभाषचंद्र बोस भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे।‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा’, इस नारे को देश की आजादी के लिए ब्रह्म वाक्‍य का रूप देने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देश की आजादी के लिए देश से बाहर रहकर संघर्ष किया। उनकी वाणी इतनी
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सुभाषचंद्र बोस के घर के सामने एक बूढ़ी भिखारिन रहती थी। वे देखते थे कि वह हमेशा भीख मांगती थी और दर्द साफ दिखाई देता था। उसकी ऐसी अवस्था देखकर उसका दिल दहल जाता था। भिखारिन से मेरी हालत कितनी अच्‍छी है यह सोचकर वे स्वयं शर्म महसूस करते थे। उन्हें यह देखकर बहुत कष्ट
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23 जनवरी 1897 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाषचंद्र बोस का जन्म कटक के प्रसिद्ध वकील जानकीनाथ तथा प्रभावतीदेवी के यहां हुआ। उनके पिता ने अंगरेजों के दमनचक्र के विरोध में ‘रायबहादुर’ की उपाधि लौटा दी। इससे सुभाष के मन में अंगरेजों के प्रति कटुता
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हिन्दी निबंध- गणतंत्र दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाने वाला भारत का राष्ट्रीय पर्व है, जिसे प्रत्येक भारतवासी पूरे उत्साह, जोश और सम्मान के साथ मनाता है। राष्ट्रीय पर्व होने के नाते इसे हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मनाते हैं। गणतंत्र दिवस : 26 जनवरी सन 1950 को हमारे देश को
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कड़क ठंड में शाला जाना, बहुत कठिन है, बहुत कठिन है। घर से बाहर थोड़ा निकलूं, आज नहीं बिलकुल भी मन है। ओढ़ रजाई सो जाऊंगा, रखो रूम में हीटर एक। थर-थर कांप रहा हूं मम्मी, आकर मुझको जल्दी देख।
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मकर संक्राति तिल गुड़ की मिठास के साथ-साथ पतंगबाजी के उत्साह से भरा पर्व है। लेकिन पतंगबाजी के पेंच लड़ाकर, हर पल रोमांच और खुशि‍यों से भर देने वाला यही पर्व एक ही पल में आपसे सारी खुशि‍यां छीन भी सकता है। जी हां, पतंग उड़ाने के लिए आप जिस मांझे का इस्तेमाल करते हैं,
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मकर संक्रांति खुशियों का पर्व है। लेकिन इस दिन पतंगबाजी के उत्साह में कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सैकड़ों लोग घायल हो जाते हैं। आइए जानें क्या सावधानियां जरूरी है इस खेल से पहले…. 1. सुरक्षि‍त स्थान पर खड़े होकर ही पतंग उड़ाएं। हो सके तो खुले मैदान में जाकर पतंग उड़ाने का
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* स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि जिस पल मुझे यह ज्ञात हो गया कि हर मानव के हृदय में भगवान हैं तभी से मैं अपने सामने आने वाले हर व्यक्ति में ईश्वर की छवि देखने लगा हूं और उसी पल मैं हर बंधन से छूट गया। हर उस चीज से जो बंद रखती है, धूमिल
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंगरेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे। नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को
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मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है, जो सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से
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