नन्ही दुनिया

नोमू का मुंह पुता लाल से सोमू की पीली गुलाल से कुर्ता भीगा राम रतन का, रम्मी के हैं गीले बाल। मुट्ठी में है लाल गुलाल।। चुनियां को मुनियां ने पकड़ा नीला रंग गालों पर चुपड़ा इतना रगड़ा जोर-जोर से, फूल गए हैं दोनों गाल। मुट्ठी में है लाल गुलाल।। लल्लू पीला रंग ले आया
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जिसे बचाने मुहिम चली है, सिर पर चढ़ा जुनून। नाम बताओ इसका क्या है? भैया अफ़लातून। ठोस द्रव्य या भाप रूप में, रहता है यह भैया। लहरों के संग नदी ताल में, करता ता ता थैया। इसके सेवन से तन मन को, मिलता बड़ा सुकून। शातिर लोग इसे तो अच्छों अच्छों को पिलवाते। साईस इसको
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होली, प्यारभरे रंगों से सजा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय व जाति के बंधन खोलकर भाईचारे का संदेश देता है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूलकर गले लगते हैं और एक-दूजे को गुलाल लगाते हैं। होली एक ऐसा रंग-बिरंगा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते
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– रितु अग्रवाल, महू प्रस्तावना : सदियों से नारी को एक वस्तु तथा पुरुष की संपत्ति समझा जाता रहा है। पुरुष नारी को पीट सकता है, उसके दिल और शरीर के साथ खेल सकता है, उसके मनोबल को तोड़कर रख सकता है, साथ ही उसकी जान भी ले सकता है। मानो कि उसे नारी के
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-डॉ. कामिनी वर्मा ज्ञानपुर (भदोही) उत्तरप्रदेश 10 मई 1857 मेरठ छावनी में सैनिकों के आक्रोश से उत्पन्न संघर्ष भारतीय इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से उल्लिखित है जिसमें शीघ्र ही ब्रिटिश शासकों की शोषणकारी नीतियों और दमनात्मक कार्रवाई से पीड़ित शासक व विशाल जनसमूह व्यापक स्तर पर शामिल हो गया। यद्यपि यह संग्राम
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स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री, देश की पहली महिला गवर्नर, केसर-ए-हिन्द श्रीमती सरोजिनी नायडू उन महिलाओं में से हैं, जिन्होंने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए कठिन संघर्ष किया। उन्होंने वर्ष 1925 में आयोजित कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्षता करके ऐसा करने वाली राष्ट्रीय स्तर की चंद महिला नेताओं में अपना नाम शामिल करवाने का सौभाग्य
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रौनक थी बड़ी; हमें कुछ नहीं भाया, मेले में मज़ा नहीं आया। चहल-पहल; धक्का-मुक्की; रेलमपेल, ऊंचे-ऊंचे झूले, बच्चों की रेल, मां के हाथों सा ना किसी ने झुलाया मेले में मज़ा नहीं आया… खाई आलू चाट; पी कोकाकोला, ली ठंडी सोफ़्टी, चूसा बर्फ़ का गोला, पहले जैसा स्वाद नहीं किसी में आया। मेले में मज़ा
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समर्थ रामदास स्वामी महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे। वे महाराजा छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु थे। उनके अमूल्य विचारों से कई महापुरुष भी प्रेरित थे। उनके विचारों ने लोगों और समाज को एक नई दिशा दी। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं उनके 20 अनमोल विचार। आइए जानें… * जो अधर्म करता है और
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सन् 1986 से भारत में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (नेशनल साइंस डे) मनाया जाता है। प्रोफेसर सी.वी. रमन (चंद्रशेखर वेंकटरमन) ने सन् 1928 में कोलकाता में इस दिन एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी, जो ‘रमन प्रभाव’के रूप में प्रसिद्ध है। रमण की यह खोज 28 फरवरी 1930 को प्रकाश में आई
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गोलू स्कूल से घर लौटते ही दादाजी के कमरे की ओर दौड़ा। दादाजी… दादाजी… आपसे एक बहुत ही जरूरी सवाल पूछना है। हांफते हुए बोला। ठीक है भाई पूछ लेना पर पहले थोड़ी देर आराम तो कर लो, अपनी स्कूल की ड्रेस तो बदल लो। फिर एक नहीं दस सवाल पूछ लेना। गोलू अपनी स्कूल
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स्वतंत्रता संग्राम के महानायक चंद्रशेखर आजादका जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। उनका जन्मस्थान भाबरा अब ‘आजादनगर’ के रूप में जाना जाता है। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माता का नाम जगदानी देवी था। उनके पिता ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के
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एक बार की बात है किसी गांव में एक लड़का रहता था। उसका नाम छोटू था, वो दिनभर खेतों में काम करता और खेती करके ही अपने परिवार का गुजारा चलता था। छोटू वैसे तो अब बड़ा हो गया था लेकिन उसने बचपन से ही बहुत गरीबी देखी थी। छोटू को हमेशा लगता था कि
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टीवी पर एक विज्ञापन में एक बच्चा अपनी मम्मी से पूछता है कि फरवरी में 28 दिन क्यों होते हैं? क्या आपने कभी सोचा फरवरी के साथ यह अन्याय क्यों किया गया? आखिर क्यों फरवरी सिर्फ 28 दिन का होता है? आइए हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्या हुआ जो फरवरी लगातार तीन सालों
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मराठा गौरव शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम भारत के उन वीर सपूतों में शुमार है जिन्होंने अपनी वीरता और पराक्रम के दम पर मुगलों को घुटने टेकने पर विवश कर दिया था। बहुत से लोग इन्हें ‘हिन्दू हृदय सम्राट’ कहते हैं, तो कुछ
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बहुमुखी प्रतिभा के धनी छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती महाराष्ट्र में वैसे तो 19 फरवरी को मनाई जाती है लेकिन कई संगठन शिवाजी का जन्मदिवस‍ हिन्दू कैलेंडर में आने वाली तिथि के अनुसार मनाते हैं। देश के अनेक महापुरुषों ने वैशाख मास में जन्म लिया, उसी में वैशाख शुक्ल पक्ष में छत्रपति शिवाजी का जन्म
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सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय था, जो एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। मात्र 14 वर्ष की उम्र में सरोजिनी ने सभी अंग्रेजी कवियों की रचनाओं का अध्ययन कर लिया था। 1895 में हैदराबाद के निजाम ने उन्हें वजीफे पर इंग्लैंड भेजा। 1898 में उनका विवाह
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