नन्ही दुनिया

शीत लहर में आंगन वाले, बड़ के पत्ते हुए तर बतर। चारों तरफ धुंध फैली है, नहीं कामवाली है आई। और दूध वाले भैया ने, नहीं डोर की बैल बजाई। झाड़ू पौंछा कर मम्मी ने, साफ कर लिया है खुद ही घर। दादा दादी को दीदी ने, बिना दूध की चाय पिलाई। कन टोपा और
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भूमिका : गाय का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। वैदिक काल में गायों की संख्‍या
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भारत में प्रत्येक वर्ष 14 नवंबर को पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। जो सपने चाचा नेहरू ने बच्चों के खुशहाल जीवन को लेकर देखें थे, वे आज कई धूमिल होते नजर आ रहे हैं। आज भी देश के करोड़ों बच्चे दो जून की रोटी के लिए
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1 एक बच्चे ने दूसरे बच्चे से पूछा – क्या तुम चीनी भाषा पढ़ सकते हो ? दूसरे बच्चे ने कहा – हां, अगर वह हिंदी और अंग्रेजी में लिखी हो तो… हा हा हा ——————- पिता अपने बेटे से – देखों बेटा, जुआ नहीं खेलते। यह ऐसी आदत हैं कि यदि इसमें आज जीतोगे
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प्रभात’ नेहरू चाचा तुम्हें सलाम अमन-शांति का दे पैगाम जग को जंग से बचाया हम बच्चों को भी मनाया जन्मदिवस बच्चों के नाम नेहरू चाचा तुम्हें सलाम देश को दी हैं योजनाएं लोहा और इस्पात बनाए बांध बने बिजली निकाली नहरों से खेतों में हरियाली प्रगति का दिया इनाम नेहरू चाचा तुम्हें प्रणाम
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जितेंद्र वेद बाल दिवस, हर साल मनाया जाने वाला त्योहार। पर लगता है दुनिया में धीरे-धीरे बच्चों का अकाल पड़ता जा रहा है। पहले बचपन यानी चौदह-पंद्रह साल तक, पर गतिशील समाज में बचपन सिकुड़ता जा रहा है। टीन-एज गोया उम्र के दौर से गायब हो गई है। हर जगह बच्चों में परिपक्वता सालने लगी
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बच्चों में संस्कारों का विकास हमेशा अपने से बड़ों को देखकर ही होता है इसलिए अपने आचरण को सही रखना भी उतना ही जरूरी है जितना बच्चे पर ध्यान देना। कहते हैं न ‘अगर ठीक से खाद डाली जाए, तो पौधा बहुत सुंदर होता है’ और संस्कार उसी खाद का काम करते हैं। आपाधापी वाले
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1.स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित करने वाले (लाहौर 1929, लखनऊ 1936, फैजपुर 1937, दिल्ली 1951, हैदराबाद 1953 और कल्याणी 1954) पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को इलाहाबाद में हुआ। 2. हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि
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भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बारे में वैसे तो आपने कई वाकए सुने होंगे, इंदिरा से जुड़े हुए महत्वपूर्ण वाकयों में 1975 की इमरजेंसी और ऑपरेशन ब्लूस्टार शामिल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे इंदिरा नेहरू से इंदिरा गांधी कैसे बन गईं? वैसे ये वाकया स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले का
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भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी। एक ऐसी महिला जो न केवल भारतीय राजनीति पर छाई रहीं बल्कि विश्व राजनीति के क्षितिज पर भी वह विलक्षण प्रभाव छोड़ गईं। यही वजह है कि उन्हें लौह महिला के नाम से संबोधित किया जाता है। श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म नेहरू खानदान में हुआ था। वह
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इंदिरा गांधी के भीतर गजब की राजनीतिक दूरदर्शिता थी। इंदिरा का जन्म 19 नवंबर, 1917 को हुआ। पिता जवाहर लाल नेहरू आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वालों में शामिल थे। वही दौर रहा, जब 1919 में उनका परिवार बापू के सानिध्य में आया और इंदिरा ने पिता नेहरू से राजनीति का ककहरा सीखा। वे
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अपना व्यवहार ऐसा हो कि बच्चा सीख जाए सच बोलना बच्चे बहुत नाज़ुक मन के होते हैं, बिलकुल गीली मिट्टी जैसे। उन्हें आप जो सीखाना चाहते वे तुरंत ही सीख जाते है। छोटे बच्चों के ढ़ेरो अजीब प्रकार के सवाल होते है, कई बार वे आपसे ऐसे कुछ सवाल कर देते हैं जिन्हें उनकी इस
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कितने मज़े हमारे होते। तीस इंच के होते पापा, बीस इंच की मम्मी। मैं होता बस आठ इंच का, पांच इंच की सिम्मी। एक इंच के बस्ते लेकर, हम शाला को जाते होते। बारह फुट लंबी बस होती, होतीं सीटें साठ। तीन इंच चौड़ी सीटों पर, होते अपने ठाठ। हिचकोले खाती इस बस में, मस्ती
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चाणक्य का व्यक्तित्व सभी के लिए अनुकरणीय एवं आदर्श है। चाणक्य नीति हम सभी के लिए बहुत उपयोगी है। आइए जानते हैं चाणक्य नीति की 10 खास बातें… * जिस अध्यात्मिक सीख का आचरण नहीं किया जाता वह जहर के समान है। * जिस गुरु के पास अध्यात्मिक ज्ञान नहीं है, उसे दूर करो। *
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1. स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्हें बच्चों से बेहद लगाव और प्रेम था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष उनके जन्मदिन को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। 2. नेहरूजी के बारे में सोचते ही उनकी ‘नेहरू
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हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। इसी दिन स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म हुआ था, उन्हें बच्चों से बेहद लगाव और प्रेम था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रति वर्ष उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंडित जवाहर लाल
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