Bhai Dooj 2018: यह है भाई दूज की कथा और इस दिन की जानेवाली प्रार्थना

राशि


32569-4-astro-why-and-how-to-celebrate-bhaiduj.jpg

यमलोक के देवता यमराज और देवी यमुना भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी संज्ञा की संतान हैं। शनिदेव सूर्य और छाया की संतान हैं। देवी छाया, संज्ञा की ही प्रतिछाया थीं। यमराज को यमलोक का देवता माना गया है। देवी लक्ष्मी, सरस्वती और यमुना को पृथ्वी पर आने का शाप मिला। तब लक्ष्मी तुलसी रूप में और सरस्वती और यमुना नदी रूप में धरती पर आ गईं।

यमलोक के देवता यमराज अपने कार्य में बहुत व्यस्त रहते हैं। एक बार उन्हें अपनी बहन यमुना की बहुत याद आई। उन्होंने अपने कार्य से अवकाश लेकर अपनी बहन यमुना से मिलने का निर्णय लिया। यमराज बहन को खोजते हुए पृथ्वी पर आए और उनके साथ पूरा एक दिन बिताया।

भाई को देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने स्नादि करके भाई के लिए भोजन तैयार किया और तिलक करने के बाद उन्हें कई तरह के पकवान परोसकर भोजन कराया। यमराज ने प्रसन्न होकर अपनी बहन को बहुत से उपहार दिए। जब यमराज के वापस लौटने का समय आया तब उन्होंने यमुना से कहा, बहन यमी हम तुम्हारे आदर-सत्कार से बहुत प्रसन्न हैं। तुम मनचाहा वरदान हमसे ले सकती हो।

यह भी पढ़ें: Bhai Dooj 2018: तिलक के शुभ मुहूर्त से लेकर पूजन विधि तक, जानें भाई दूज से जुड़ा हर रिवाज 

यमराज की बात सुनकर यमी ने कहा, भाई आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर आप मुझसे मिलने आए हैं। मैं चाहती हूं कि आप हर साल इस दिन मुझसे मिलने आएं। साथ ही जो भाई आज के दिन अपनी बहन के घर जाकर भोजन करे, उसके साथ समय बिताए और उसे यथासंभव उपहार दे। ऐसे भाइयों को आप अकाल मृत्यु के भय से मुक्त करें।

बहन यमुना की बात सुनकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया कि जैसी तुम्हारी इच्छा है, वैसा ही होगा। आज के दिन जो भी तुम्हारे जल में स्नान करके अपनी बहन के घर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा। उसी दिन से हर साल भाई दूज का पर्व मनाया जाने लगा। मान्यता है कि आज के दिन यमराज बहन से मिलने पृथ्वी पर आते हैं और बहन के घर जाकर भोजन करनेवाले भाइयों को अभय दान देते हैं।

हमारे समाज में कई जगह आज के दिन बहने अपने भाइयों को अपशब्द बोलते हुए कहती हैं – बाघ काटे, चीता काटे, सांप काटे, बिच्छु काटे, जो काटे सो आज काटे। ऐसा बोलने के पीछे विश्वास है कि आज कोई भी विषैला जीव काटे या समस्या आए, आज उनके भाइयों को कुछ नहीं होगा। क्योंकि स्वयं यमराज उनके भाई के जीवन की रक्षा करेंगे।

भाई दूज तिलक का शुभ मुहूर्त

सुबह पूजा का मुहूर्त: 9:20 से 10:35 बजे तक
दोपहर में पूजा का मुहूर्त: 1:20 से 3:15 बजे तक
संध्या काल में पूजा मुहूर्त: 4:25 से 5:35 बजे तक
शाम के समय पूजा मुहूर्त: 7:20 से रात 8:40 बजे तक

भाईदूज तिलक का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 16 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक

यमुना में स्नान न कर सकें तो ऐसे मनाएं त्योहार

-भाईदूज के दिन भाई और बहन दोनों को मिलकर सुबह के समय यम, चित्रगुप्त, यम के दूतों की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद सूर्यदेव के साथ ही इन सभी को भी अर्घ्य देना चाहिए।

– यम की पूजा करते हुए बहन प्रार्थना करें कि हे यमराज, श्री मार्कण्डेय, हनुमान, राजा बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी होने का वरदान दें।

– प्रार्थना के बाद बहन अपने भाई का टीका करें, अक्षत लगाएं और भाई को भोजन कराएं।

– भोजन के पश्चात भाई यथाशक्ति बहन को उपहार या दक्षिण दें

Products You May Like

Articles You May Like

तकनीकी बदल सकती है दिव्यांगो का जीवन: गहलोत
CBI के शीर्ष अधिकारी छुट्टी पर, नतीजा- कामकाज पर पड़ रहा है असर, नहीं लिए जा रहे कई बड़े मामलों में फैसले
इस परीक्षा के लिए रद्द की गईं फ्लाइट्स, ट्रैफिक में फंसेगा स्टूडेंट तो मिलेगी ये सुविधा
Realme 1 और Realme 2 Pro को इस महीने मिलेगा यह खास अपडेट
Samsung W2019 फ्लिप फोन हुआ लॉन्च, जानें क्या है खास

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *