ऐसा तब होता है, जब ईश्वर से प्यार हो जाए

राशि


20900-A-photo-help.jpg

संकलन: हफीज किदवई

बहराम बिन फरशाद फारस देश के मशहूर सूफी संत हुए हैं। वह ईश्वर भक्ति में इस कदर लीन रहते थे कि उन्हें हर एक में ईश्वर दिखाई देता और वह उसकी सेवा में लग जाते। एक रोज एक व्यक्ति ने उनकी परीक्षा लेने की सोची और बहराम के घर आया। जैसे ही वह आया, बहराम बिन फरशाद दौड़कर दरवाजे पर आए और उसके पांव को हाथ में लेकर धूल साफ करने लगे। उसके गले लगकर ईश्वर के प्रेम में इतना रोए कि उस व्यक्ति के कपड़े भीग गए। तभी बाहर एक सिपाही एक लड़के को पीटने लगा।

बहराम बिन फरशाद ने उस सिपाही से पूछा कि इसका कसूर क्या है? सिपाही बोला कि इसका भाई मेरे पैसे लेकर भाग गया, यह वापस नहीं दे रहा। संत ने पूछा कि गुनाह इसके भाई ने किया, पीट इसे रहे हो, इससे बड़ी क्या बेईमानी होगी? फिर तो सिपाही संत पर ही भड़क गया। इतने में पिटनेवाला बोला कि वह अपने भाई को ढूंढ़कर उसके पास भेज देगा। सिपाही ने पूछा कि तब तक उसका काम कौन करेगा? बहराम बिन फरशाद बोले कि तब तक तुम्हारा काम मैं करूंगा। यह कहकर वे सिपाही के साथ चल दिए।

संत की परीक्षा लेनेवाला व्यक्ति यह देख हैरत में पड़ गया कि एक अनजान से इतनी मोहब्बत! कई दिन बहराम बिन फरशाद उस सिपाही के यहां काम करते रहे। एक दिन उनके शिष्यों ने आकर सिपाही को पूरा हाल बताया। तब वह सिपाही और परीक्षा लेने आया व्यक्ति बहराम बिन फरशाद के कदमों में गिर पड़े और माफी मांगने लगे। सिपाही ने कहा कि अब आप आजाद हुए। तब संत ने कहा कि यह आजादी वह तब तक नही लेंगे, जब तक दोनों वादा नहीं करते कि जिंदगी में कभी अन्याय नहीं करेंगे। दोनों ने संत से वादा किया, तब कहीं जाकर संत बहराम बिन फरशाद ने आजादी कबूल की और दूसरों की सेवा में लगे।

Products You May Like

Articles You May Like

रंजीत पांडे आईसीएसआई के अध्यक्ष निर्वाचित
दिल्लीः पुलिस को देखकर नेपाली लड़कियों का तस्कर कूदा यमुना में, कांस्टेबल ने लगा दी नदी में छलांग
Ind vs Aus 3rd ODI LIVE: ऑस्ट्रेलिया को लगा चौथा झटका, एक ही ओवर में चहल ने झटके दो विकेट
ईवीएम को हैक करने के दावों में कितना दम?
Today in History: सुभाष चंद्र बोस और शिवसेना का गठन करने वाले बाल ठाकरे जन्मे थे आज, जानिए 23 जनवरी का पूरा इतिहास

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *