मणिपुरः ऐक्ट ईस्ट पॉलिसीके लिए जरूरी है हालात में सुधार

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केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और एशियन हाइवे के लिए मणिपुर के हालात में सुधार जरूरी है। अभी हालात पहले से बेहतर तो हुए हैं लेकिन बंद और इकॉनमिक ब्लॉकेड का साया मंडरा ही रहा है। पिछले छह महीने में यहां 31 दिन बंद रहा और करीब 12 दिन इंटरनेट ब्लैकआउट किया गया। आर्मी और असम राइफल्स यहां मानवीय चेहरा दिखाने के लिए कई कार्यक्रम तो कर रही है लेकिन अब भी लोगों के मन से इंसरजेंसी और सिक्यॉरिटी फोर्स के बीच पिसने का डर गया नहीं हैं।


ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी का सेंटर


सरकार की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी का मणिपुर सेंटर बन गया है। एशियन हाइवे-1 भारत को मणिपुर के जरिए आसियान देशों से जोड़ेगा। हालांकि मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड से वैकल्पिक रास्ते हैं लेकिन मणिपुर सबसे सुगम है। मणिपुर में उग्रवादी जिस तरह अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहते हैं और बंद के कहर से मणिपुर उबर नहीं पा रहा है। ऐसे में यह सवाल भी सामने है कि क्या मणिपुर के हालात सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को परवान चढ़ने देंगे। हालांकि मणिपुर के सीएम एन.बीरेन सिंह कहते हैं कि मणिपुर में इनसरजेंसी है लेकिन अब कुछ छोटा-मोटा छोड़कर शांति है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इनसरजेंसी विकास को बाधित नहीं करेगी। वह कहते हैं कि मणिपुर की काफी वक्त तक अनदेखी होती रही और इन्सरजेंसी की एक वजह यह भी रही। अब जब विकास हो रहा है तो मुझे उम्मीद है कि मणिपुर के लोग इसमें बाधा नहीं बनेंगे। सीएम ने कहा कि इंसरजेंट (उग्रवादी) भी विकास को बाधित करके लोगों की विकास की चाह के खिलाफ नहीं जाएंगे।


मानवीय चेहरा दिखा रही फौज पर अब भी डर बरकरार


लोगों का भरोसा जीतने के लिए सिक्योरिटी फोर्स यहां कई कार्यक्रम चला रही है। असम राइफल्स कुछ दिनों पहले ही यहां के 24 स्टूडेंट्स का नैशनल इंटीग्रेशन टूर दिल्ली सहित देश के दूसरे हिस्सों में ले गई। मकसद स्टूडेंट्स को यह दिखाना था कि देश में क्या विकास हो रहा है और मणिपुर में भी उग्रवाद पूरी तरह खत्म हो तो विकास की राह खुलेगी। यहां कई जगहों पर सिक्योरिटी फोर्स गांव वालों को मेडिकल सुविधा से लेकर एजुकेशन तक दे रही है। दिशा नाम के कार्यक्रम के जरिए इंसरजेंसी से प्रभावित बच्चों को मुफ्त एजुकेशन का इंतजाम भी सिक्योरिटी फोर्स ने किया है। यह एक रेजिडेंशियल फैसिलिटी है और अब तक 22 बच्चे 12 वीं पास कर आगे बढ़ गए हैं। इनमें 2 बच्चे इंजिनियरिंग कर रहे हैं, 1 मेडिकल की पढ़ाई और 7 बच्चे सेना में भर्ती हुए हैं। बाकी बच्चे ग्रैजुएशन कर रहे हैं।

कई गांवों तक राज्य सरकार की मशीनरी पहुंच ही नहीं पाई है और कई गांवों में बिजली का इंतजाम भी सिक्यॉरिटी फोर्स ने किया है। फौज भले ही मानवीय चेहरा दिखा रही है लेकिन लोगों के मन में उग्रवादियों के साथ ही फौज के पुराने चेहरे को याद करते हुए खौफ की झलक दिख जाती है। बीए सेकंड इयर में पढ़ रही 19 साल की एक छात्रा बताती हैं कि किस तरह यहां लोग उग्रवादियों और सिक्यॉरिटी फोर्स के बीच पिसते रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब भी क्रॉस फायरिंग होती थी हम लोग डर से बिस्तर के नीचे छुप जाते थे। हर वक्त यह डर सताता था कि पता नहीं कहां से गोली आकर लग जाएगी। हालांकि अब हालात पहले से काफी बेहतर हैं। वह कहती हैं कि ‘आर्मी अब उतनी डरावनी नहीं लगती और अब शक के आधार पर किलिंग भी कम हुई है’। वह बताती हैं कि मेरे पिता खुद आर्मी में थे और कश्मीर में तैनात थे, उनकी ऑपरेशन के दौरान शहादत हुई। आफस्पा को हटाने की भी वह वकालत करती हैं। कई गांव वालों से बात करने पर उन्होंने बताया कि वे इनसरजेंसी को सपोर्ट नहीं करते लेकिन डर की वजह से शिकायत भी नहीं कर सकते। एक गांव वाले ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उग्रवादियों ने मेरे अंकल से 3 लाख रुपये की मांग की थी। शिकायत क्यों नहीं की यह पूछने पर उन्होंने कहा कि डर की वजह से। फिर उग्रवादियों से ही निगोसिएट कर रकम कुछ कम करवाई।

शाम में बाहर निकलने का डर हो खत्म

मणिपुर में अब भी लोग शाम के वक्त बाहर निकलने से डरते हैं। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा कि अब जब माहौल सामान्य हो गया है तो हम चाहते हैं कि लोग बेखौफ बाहर आएं। उन्होंने बताया कि हमने इंफाल इवनिंग शुरू की हैं। वीकएंड पर लेट इवनिंग वॉक का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जब लोग इवनिंग में भी बाहर निकलना शुरू करेंगे तो आसपास की दुकानें भी खुलेंगी। सीएम एन.बीरेन सिंह ने कहा कि लोग अब इन्सरजेंसी का सपॉर्ट नहीं करते। विकास और स्टार्टअप की बात करते हैं। हम भी अपने अफसरों को गांवों में भेजने के लिए कार्यक्रम चला रहे हैं। ड्रग्स भी यहां एक बड़ी दिक्कत के तौर पर सामने आ रहा है। सीएम ने कहा कि पिछले साल हमने 600 ड्रग्स पैडलर गिरफ्तार किए और अब लोग भी ड्रग्स के खिलाफ एकजुट हुए हैं। सिक्यॉरिटी फोर्स के एक अधिकारी के मुताबिक इस साल कुल 96.34 करोड़ रुपये का स्मगलिंग का सामान जब्त किया गया जिसमें 66.85 करोड़ रुपये की ड्रग्स शामिल है। पिछले साल के मुकाबले ड्रग्स की स्मगलिंग में बढ़ोतरी हुई है।

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